मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में भोजशाला केस जीतने के कुछ दिनों बाद हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मंगलवार को लंदन के एक म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति को वापस लाने की मांग की है। हिंदू पक्ष का कहना है कि यह मूर्ति कोहिनूर से भी ज्यादा अहम है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया था कि भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है। कोर्ट ने एएसआई के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।
कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हिंदुओं को पूजा-पाठ और दूसरे धार्मिक कार्यों के लिए इस स्मारक तक बिना किसी रोक-टोक के जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद हिंदू समुदाय के लोगों ने वाग्देवी की प्रतिकृति स्थापित कर दी। अब हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता, जिन्होंने यह केस जीता है, लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मूल मूर्ति को वापस लाने और उसे भोजशाला में फिर से स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।
हाई कोर्ट ने 15 मई को एक आदेश जारी कर कहा था कि भारत सरकार लंदन से देवी सरस्वती की मूर्ति को वापस लाने और उसे भोजशाला परिसर में पुनर्स्थापित करने की मांगों पर विचार कर सकती है। याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी ने मंगलवार को कहा कि इसके लिए नए आवेदन किए गए हैं। इसमें केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और मध्य प्रदेश सरकार को मूर्ति वापस लाने के लिए मांग की गई है।
कुलदीप तिवारी ने दावा किया कि अंग्रेज औपनिवेशिक काल में इस मूर्ति को यहां से ले गए थे। यह मूर्ति अंग्रेजों द्वारा ले जाए गए कोहिनूर से भी कीमती है। उन्होंने कहा, “कोहिनूर की तरह ही अब वाग्देवी की मूर्ति को वापस लाने का मुद्दा भी जोर पकड़ रहा है। लेकिन हमारे लिए यह मूर्ति कोहिनूर से भी ज्यादा अहम है, क्योंकि यह हमारी आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है।”
याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि केंद्र सरकार राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाए और कूटनीतिक स्तर पर कोशिश करे तो ब्रिटेन से मूर्ति वापस लाना मुश्किल नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मूर्तियां और ऐतिहासिक कलाकृतियां पहले भी कई देशों से वापस लाई जा चुकी हैं। उनके मुताबिक, अभी भोजशाला परिसर में वाग्देवी की मूर्ति की प्रतिकृति प्रतीकात्मक रूप से स्थापित की गई है, लेकिन हिंदू पक्ष की मांग मूल मूर्ति को वापस लाने की है।
‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल ने भी केंद्र सरकार से यही मांग की है। उन्होंने साल 2024 में भोजशाला परिसर के एएसआई सर्वेक्षण के दौरान मिली 94 मूर्तियों को भी उसी स्थान पर सम्मानपूर्वक फिर से स्थापित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि कुबेर, अर्धनारीश्वर और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां वापस लाया जाना चाहिए। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और ब्रिटिश सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है।