महाराष्ट्र के नागपुर निवासी कैलाश उसराठे अपने परिवार के साथ ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंचे थे। श्रद्धालुओं को लेकर आई बस शुक्रवार रात जैसे ही ब्रह्मपुरी पार्किंग में रुकी, कैलाश का तीन वर्षीय बेटा बस से उतरकर आगे-आगे दौड़ने लगा।
रास्ते में लौवंशी धर्मशाला के पास नगर परिषद की अतिक्रमण मुहिम के दौरान तोड़े गए हिस्से में एक सेफ्टी टैंक खुला पड़ा था। शाम के वक्त अंधेरा होने के कारण मासूम को टैंक का अंदाजा नहीं लग सका और वह सीधे गंदे पानी से भरे टैंक में जा गिरा।
पिता ने दिखाई बहादुरी
बच्चे के गंदे पानी में गिरते ही उसकी चीख-पुकार सुनकर आसपास हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और बस सवारों में अफरातफरी मच गई।
बच्चे को डूबता देख पिता कैलाश ने पलभर की भी देरी किए बिना सीधे गहरे टैंक में छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मदद से काफी मशक्कत के बाद मासूम को टैंक से बाहर निकाला जा सका।
स्थिति चिंताजनक
हादसे के तुरंत बाद मासूम को प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया। ओंकारेश्वर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रवि वर्मा ने बच्चे की स्थिति को बेहद गंभीर देखते हुए उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर तुरंत एंबुलेंस के जरिए सनावद रेफर कर दिया।
सनावद अस्पताल में मासूम की हालत नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाने के बाद सेफ्टी टैंक को खुला छोड़ देना प्रशासन की भारी लापरवाही को उजागर करता है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले तीर्थस्थल पर इस तरह की अनदेखी किसी बड़ी त्रासदी को न्योता देने जैसी है।
इस घटना ने तीर्थस्थल पर सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस खुले सेफ्टी टैंक को सुरक्षित करने और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।