मध्य प्रदेश के कटनी जिले में देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है। जिले के स्लीमनाबाद में बनी तकरीबन 12 किलोमीटर लंबी इस टनल में अब सिर्फ दो मीटर खुदाई बाकी है।
इसके बाद ऐतिहासिक ब्रेकथ्रू होगा और पहली बार बरगी बांध का पानी बिना किसी पंप या लिफ्ट के विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को परियोजना का जायजा लेंगे।
क्यों है यह सुरंग खास?
यह सुरंग केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि विंध्य पर्वतमाला को भेदकर नर्मदा के पानी को सीधे सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग मिसाल है।
इसके शुरू होते ही विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के 1450 गांवों के लाखों किसानों की जिंदगी में समृद्धि और खुशहाली का नया सवेरा आएगा।
पौराणिक विरह को मिटाएगा ‘आधुनिक महासेतु’
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक से निकलने वाली मां नर्मदा और सोनभद्र विपरीत दिशाओं में बहकर हमेशा के लिए एक-दूसरे से जुदा हो गए थे।
सरकार ने इसी प्राचीन विरह को मिटाने और विंध्य की सदियों से प्यासी धरती को सींचने के लिए इस परियोजना को अपना ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बनाया।
कठिनाइयों से भरा रहा सफर
विंध्य की 40 मीटर ऊंची कठोर चट्टानों और जमीन से करीब 30 मीटर नीचे चल रहे इस महा-अभियान में कदम-कदम पर मुश्किलें थीं।
मार्बल, कठोर लाइमस्टोन और डोलोमाइट की मजबूत चट्टानों के साथ-साथ टनल के भीतर प्रति मिनट 25 हजार लीटर तक होने वाले पानी के रिसाव ने काम को रोक दिया था। एक समय तो ऐसा आया जब अमेरिकी मशीन भी टूटकर पस्त हो गई थी।
जर्मन तकनीक ने बचाई बाजी
ऐसे नाजुक मोड़ पर अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक को मैदान में उतारा गया।
घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के ठीक नीचे से गुजरने के बावजूद इस टनल को बिना किसी जान-माल के नुकसान के बेहद सुरक्षित तरीके से पूरा कर लिया गया।
विंध्य के इन जिलों को मिलेगा नया जीवन
इस महा-सुरंग का व्यास 10.14 मीटर है। टनल के पूरी तरह क्रियाशील होते ही बरगी दायीं तट मुख्य नहर के जरिए पानी सीधे खेतों में पहुंचेगा, जिससे इन जिलों की सूखी भूमि लहलहा उठेगी:
- कटनी जिला: 21,823 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी
- मैहर जिला: 54,227 हेक्टेयर भूमि को मिलेगा पानी
- सतना जिला: सबसे अधिक 1,04,970 हेक्टेयर भूमि हरी-भरी होगी
- रीवा जिला: 3,084 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा
- पन्ना जिला: 448 हेक्टेयर सूखी भूमि को जीवन मिलेगा
कब तक पूरा होगा काम?
सरकार ने इस परियोजना का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट का 96.66% भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है।
- मार्च 2026 तक: 44,160 हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता पूरी
- दिसंबर 2026 तक: 87,433 हेक्टेयर सिंचाई की व्यवस्था
- दिसंबर 2027 तक: कुल 1,54,693 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई पूरी