प्रदेश की तीन पारंपरिक फसलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान, जनजातीय किसानों को मिलेगा बेहतर दाम, जीआई टैग के प्रस्ताव चेन्नई भेजे गए
खेती-किसानी की दुनिया के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आ रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की तीन पारंपरिक फसलों – सिताही कुटकी (Sitahi Kutki), नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki) और बैंगनी अरहर (Purple Arhar) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग (GI Tag) की प्रक्रिया तेज कर दी है।
जीआई टैग के प्रस्ताव चेन्नई भेजे गए
मध्यप्रदेश सरकार ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ (Krishak Kalyan Varsh 2026) के संकल्प के साथ श्रीअन्न (Shree Anna) यानी मोटा अनाज (millets) को किसानों की आर्थिक उन्नति का आधार बना रही है। प्रदेश की तीन फसलों सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगनी अरहर के जीआई टैग के प्रस्ताव तैयार कर भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री चेन्नई (Geographical Indication Registry Chennai) भेज दिए गए हैं।
इस कदम से न केवल इन फसलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान (international recognition) मिलेगी, बल्कि जनजातीय किसानों (tribal farmers) को उनकी उपज का बेहतर दाम भी मिल सकेगा।
तीन फसलों की खासियत
सिताही कुटकी (Sitahi Kutki)
- यह मात्र 60 दिनों (60 days) में तैयार होने वाली ‘लिटिल मिलेट’ (little millet) की देशी किस्म है।
- कम उपजाऊ मिट्टी और सूखे में भी स्थिर पैदावार (10-11 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) देती है।
- डिंडोरी (Dindori) के पहाड़ी क्षेत्रों के 54 गांवों में यह आजीविका का मुख्य साधन बन चुकी है।
नागदमन कुटकी (Nagdaman Kutki)
- डिंडोरी की यह विशिष्ट किस्म अपने औषधीय गुणों (medicinal properties) और उच्च पोषण मूल्य (high nutritional value) के लिए जानी जाती है।
बैंगनी अरहर (Purple Arhar)
- भरपूर प्रोटीन (protein) वाली इस किस्म में रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता है।
- अच्छी देखभाल से किसान इसका 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (15-20 quintals per hectare) तक उत्पादन ले रहे हैं।
रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य के 16 जिलों (16 districts) (जबलपुर, मंडला, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, शहडोल आदि) में पहली बार 1000 रुपये प्रति क्विंटल (Rs 1000 per quintal) के मान से कोदो-कुटकी (kodo-kutki) की प्रोत्साहन खरीदी (incentive purchase) हो रही है। अब तक 22 हजार से अधिक किसानों (over 22,000 farmers) ने पंजीकरण कराया है, जिससे 21 हजार हेक्टेयर (21,000 hectares) क्षेत्र कवर हुआ है।
कुपोषण मुक्त अभियान की सफलता
श्योपुर (Sheopur) जिले में सहरिया जनजाति (Sahariya tribe) के बच्चों में कुपोषण (malnutrition) दूर करने के लिए कोदो-कुटकी आधारित व्यंजनों का सफल प्रयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप 2 हजार बच्चों (2,000 children) के स्वास्थ्य स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। वहीं, डिंडोरी के समनापुर ब्लॉक (Samanapur block) में 1250 महिला किसान (1,250 women farmers) संगठित होकर इसकी खेती कर रही हैं।
जीआई टैग मिलने से क्या होगा लाभ?
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (Jawaharlal Nehru Agricultural University), जबलपुर द्वारा तैयार दस्तावेजों के आधार पर जीआई टैग (GI Tag) मिलने से:
- इन फसलों की शुद्धता और गुणवत्ता की ‘ग्लोबल गारंटी’ (global guarantee) मिलेगी
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों (international markets) में मांग बढ़ेगी
- मध्य प्रदेश का श्रीअन्न एक शक्तिशाली ‘ब्रांड’ (brand) के रूप में उभरेगा