परम आशावर ने अपनी जमा-पूंजी और गहने दांव पर लगाकर गांव की बेटियों को नेशनल लीग के मंच तक पहुंचाया, मध्य प्रदेश का नाम किया रोशन
खेल के प्रति ऐसा समर्पण (dedication) शायद ही कहीं देखने को मिले। मध्य प्रदेश पुलिस की 7वीं वाहिनी में पिछले 16 वर्षों (16 years) से कांस्टेबल (constable) के पद पर तैनात परम आशावर (Param Ashawar) ने साबित कर दिया है कि अगर विजन साफ हो, तो तंगहाली भी रास्ता नहीं रोक सकती।
कर्ज और जुनून की कहानी
परम ने न सिर्फ मध्य प्रदेश की ‘वीमन फुटबॉल लीग’ (Women Football League) को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि अपनी खुद की प्रॉपर्टी दांव पर लगाकर गांव की बेटियों को नेशनल लेवल (national level) का खिलाड़ी बना दिया।
टूर्नामेंट में जाने और टीम की तैयारी के लिए पैसों की भारी कमी थी। परम ने हार नहीं मानी और 10 लाख रुपये (Rs 10 lakh) का व्यक्तिगत लोन (personal loan) लिया। जब रकम कम पड़ी, तो पत्नी के गहने गिरवी (wife’s jewelry pledged) रखकर 2 लाख रुपये (Rs 2 lakh) और जुटाए। कुल 12 लाख रुपये (Rs 12 lakh) खर्च कर उन्होंने टीम को बेंगलुरू (Bengaluru) भेजा।
टीम ने दिखाया शानदार प्रदर्शन
18 से 30 मार्च 2026 (March 18-30, 2026) तक बेंगलुरू में आयोजित इंडियन वीमेंस लीग (टियर-2) (Indian Women’s League Tier-2) में 16 टीमों ने हिस्सा लिया। बेंगलुरु में गैस की भारी किल्लत के कारण टीम का खर्च बजट से ऊपर निकल गया, लेकिन कोच ने खिलाड़ियों को कोई कमी नहीं आने दी (no shortage allowed) ।
टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए ओडिशा फुटबॉल क्लब (Odisha Football Club) और रूट्स फुटबॉल क्लब (Roots Football Club) जैसी मजबूत टीमों को धूल चटाई। मध्य प्रदेश की यह टीम पॉइंट टेबल पर तीसरे (3rd on points table) और गोल्ड स्कोर में चौथे (4th in gold score) स्थान पर रही।
गांव की बेटियों का मुफ्त सिलेक्शन
कोच परम ने रायसेन डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल क्लब (DRFC) के माध्यम से गांव, शहर और अन्य राज्यों की प्रतिभाशाली बेटियों को जोड़ा। टीटी नगर स्टेडियम (TT Nagar Stadium) में लगे कैंप में 30 में से 22 खिलाड़ियों (22 out of 30 players) का चयन किया गया।
खास बात यह है कि कोच ने किसी भी खिलाड़ी से एक पैसा शुल्क (no fee) नहीं लिया। ट्रेनिंग (training) , किट (kit) , रहने और खाने का पूरा खर्च उन्होंने खुद उठाया।
परम का विजन
परम का विजन साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों (daughters of rural areas) में छिपी प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना है। उन्होंने खुद विभिन्न राज्यों के दौरे कर ट्रायल लिए और एक ऐसी टीम तैयार की, जिसने आज मध्य प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर ऊंचा कर दिया है।