भोपाल | मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य के सोयाबीन किसानों के लिए एक बार फिर से मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना को लॉन्च करने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत किसानों को उनकी फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और राज्य की मंडी में मॉडल भाव के बीच के अंतर की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी। यह कदम बाजार में फसल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से परेशान किसानों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
क्या है भावांतर योजना?
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को बाजार की अस्थिर कीमतों से बचाने के लिए वर्ष 2018-19 में मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि अगर किसान को मंडी में उसकी फसल के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम मिलते हैं, तो सरकार उस अंतर की भरपाई करेगी। हाल ही में इस योजना को विशेष रूप से सोयाबीन किसानों के लिए फिर से शुरू किया गया है। किसान पहले की तरह ही मंडी में अपनी फसल बेचेंगे और MSP व मॉडल भाव के अंतर की राशि उन्हें DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे खाते में मिल जाएगी।
भावांतर योजना का उद्देश्य और विशेषताएं
योजना के मुख्य उद्देश्य:
- किसानों को उनकी फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाना।
- मंडी दरों में गिरावट होने पर किसानों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करना।
योजना की विशेषताएं:
- किसानों को अब बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव की कोई चिंता नहीं करनी होगी।
- यदि मंडी में फसल के दाम MSP से कम मिलते हैं, तो सरकार बाकी पैसों की भरपाई करेगी।
सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
केंद्र सरकार ने सोयाबीन के लिए 5328 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। यह वह न्यूनतम दर है जो किसान को उसकी फसल के लिए मिलनी चाहिए।
भावांतर योजना के लिए रजिस्ट्रेशन और अवधि
- रजिस्ट्रेशन तिथियां: 10 अक्टूबर 2025 से 25 अक्टूबर 2025 तक।
- योजना की अवधि: 01 नवंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
भावांतर योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। यह प्रक्रिया 10 अक्टूबर से शुरू होगी। पंजीकरण के बाद, राजस्व विभाग द्वारा किसानों और उनके रकबे का सत्यापन किया जाएगा। भुगतान उसी बैंक खाते में किया जाएगा, जो रजिस्ट्रेशन के समय दिया गया हो।
कैसे होगा क्षतिपूर्ति (Compensation) का आकलन?
योजना के तहत मुआवजे की गणना तीन स्थितियों में अलग-अलग होगी:
- यदि विक्रय दर MSP के बराबर या अधिक है: किसान को योजना के तहत कोई लाभ नहीं मिलेगा।
- यदि विक्रय मूल्य MSP से कम, लेकिन मॉडल भाव से अधिक है: किसान को MSP और विक्रय मूल्य के बीच का अंतर दिया जाएगा।
- यदि विक्रय मूल्य मॉडल भाव से भी कम है: किसान को MSP और मॉडल भाव के बीच का अंतर दिया जाएगा।
उदाहरण से समझें:
| सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) | 5328 रुपये |
| बाजार में फसल का विक्रय मूल्य | 5000 रुपये |
| सरकार से मिलने वाली क्षतिपूर्ति | 328 रुपये |
आवश्यक दस्तावेज
भावांतर योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को निम्नलिखित दस्तावेज रखने होंगे:
- ई-उपार्जन पोर्टल का रजिस्ट्रेशन नंबर
- अनुबंध पर्ची, तौल पर्ची और भुगतान पत्रक
- 4 महीने की भंडारण अवधि समाप्त होने पर बिक्री का प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- किसान आईडी