नई दिल्ली | आयकर (Income Tax) विभाग ने फॉर्म 15CB के दुरुपयोग से भारत से ₹3,675 करोड़ से अधिक की फर्जी रेमिटेंस (Foreign Remittance) भेजने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस फर्जीवाड़े (Fraud) में जयपुर, श्रीगंगानगर और हैदराबाद के तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, जबकि 40 से अधिक अन्य संस्थाएं भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि इन CAs ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच किए बिना फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र (Certificate) जारी किए, जिसके आधार पर शेल कंपनियों (Shell Companies) के जरिए अवैध रूप से विदेश पैसा भेजा गया।
क्या है फॉर्म 15CB?
फॉर्म 15CB एक टैक्स निर्धारण प्रमाणपत्र है जो विदेश भेजी जाने वाली कुछ रकमों पर CA द्वारा जारी किया जाता है। यह प्रमाणित करता है कि लेनदेन और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर ली गई है और टैक्स देनदारी का सही निर्धारण किया गया है। इस मामले में, बिना जांच के इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर बड़ी रकम विदेश भेजी गई।
कहाँ-कहाँ और किस पर हुई कार्रवाई?
| स्थान | नाम (CA) | आरोपित राशि (₹ में) | अन्य जानकारी |
|---|---|---|---|
| जयपुर | अभिषेक जैन | 2,395 करोड़ | 3,168 फॉर्म 15CB जारी; 40 संस्थाएं जांच के दायरे में |
| श्रीगंगानगर | शेरिल गुप्ता | 815.52 करोड़ | 1,674 फॉर्म 15CB; 66 रेमिटर्स से जुड़े |
| हैदराबाद | हरि शंकर रेड्डी रेनाटी | 464.8 करोड़ | 2 शेल कंपनियों (क्लिकविन टेक्नो, स्टॉकपाइल सॉफ्टेक) से जुड़ा |
आयकर विभाग को कैसे मिला पता?
विभाग को डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी के आधार पर ऐसी कई संस्थाओं का पता चला, जिन्होंने पिछले तीन सालों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजी, लेकिन उनकी आय और कारोबार इन लेनदेन से मेल नहीं खाता था। जांच में सामने आया कि कई ऐसे लोग और कंपनियां, जिन्होंने ITR भी दाखिल नहीं किया था या जिनका कारोबार बहुत कम था, उनके नाम से विदेश में बड़ी रकम भेजी गई।
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कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
यह स्कैम शेल कंपनियों (Shell Companies) के नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा था। CA बिना बैंक खातों, समझौतों और सहायक दस्तावेजों की पुष्टि किए फॉर्म 15CB जारी करते थे। इस प्रमाणपत्र के आधार पर बैंक बिना किसी अतिरिक्त जांच के विदेशी लेनदेन को प्रोसेस कर देते थे।