नई दिल्ली | मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान (US-Iran) के बीच बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) पर देखने को मिला है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में ही भारतीय बाजार से ₹7,443 करोड़ की भारी बिकवाली (Selloff) कर दी है। यह निकासी कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में उछाल और डॉलर की मजबूती के कारण हुई है, जिससे निवेशकों का मूड एक बार फिर खराब हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
- FPI निकासी: सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से ₹7,443 करोड़ निकाले हैं। इससे पहले, जुलाई में FPIs ने ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹30,919 करोड़ का निवेश किया था।
- साल 2026 का आंकड़ा: इस नई बिकवाली के बाद, वर्ष 2026 में FPIs द्वारा भारतीय बाजार से निकाली गई कुल राशि लगभग ₹2.32 लाख करोड़ हो गई है, जो पिछले वर्ष (2025) की कुल निकासी ₹1.66 लाख करोड़ से कहीं अधिक है।
बिकवाली की मुख्य वजहें
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: अमेरिका-ईरान तनाव के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई (Inflation) का खतरा बढ़ गया है।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों (Emerging Markets) के निवेश को कम आकर्षक बना दिया है।
- डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में पैसा लगाना महंगा हो गया है।
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विशेषज्ञों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि आने वाले दिनों में FPIs का रुख अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में होने वाले बदलाव पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है, क्योंकि इससे भारत जैसे आयातक देशों पर मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) का दबाव बढ़ सकता है।