वेस्ट एशिया संघर्ष से गहराया तेल संकट दुनिया के तमाम देशों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है और इसकी आग में आम लोग झुलस रहे हैं। अमेरिका-ईरान तनातनी और दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी पूरा करने वाले होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से पाकिस्तान, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन और भारत तक में तेल की किल्लत देखने को मिली है।
लेकिन भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर एक के बाद एक तगड़ी मार पड़ रही है। ताजा बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल का दाम बढ़कर 434 रुपये हो गया है, जबकि डीजल 407 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, मिट्टी का तेल भी महंगा
वेस्ट एशिया संघर्ष और इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई रुकावटों के चलते श्रीलंका में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया है। इसके साथ ही मिट्टी का तेल भी और महंगा हो गया है।
श्रीलंका की सरकारी पेट्रोलियम कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CPC) ने शनिवार को नई दरों की घोषणा की, जो रविवार से प्रभावी हो गई हैं। नई कीमतों में डीजल 15 रुपये प्रति लीटर, पेट्रोल 24 रुपये प्रति लीटर और मिट्टी के तेल की कीमत में 20 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
तीन महीने में पांचवीं बार बढ़े दाम
ग्लोबल तेल संकट की मार से श्रीलंका किस कदर बेहाल है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन महीनों के दौरान ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह पांचवीं बढ़ोतरी है।
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके पहले भी कई बार जनता से ईंधन की खपत कम करने की अपील कर चुके हैं। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण देश पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और हालात बेहद चिंताजनक हैं।
22 दिनों में ट्रिपल अटैक, कीमतों पर लगातार मार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद श्रीलंका में 1 मार्च से 31 मई के बीच ईंधन की कीमतों में पांच बार संशोधन किया गया है। इनमें 22 दिनों के भीतर तीन बार लगातार कीमतों में इजाफा किया गया, जिसे ‘पेट्रोल-डीजल ट्रिपल अटैक’ कहा जा रहा है।
फरवरी के अंत में देश में पेट्रोल की कीमत 293 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 434 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। यानी तीन महीनों में पेट्रोल 141 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है।
श्रीलंकाई रुपया भी कमजोर, डॉलर के मुकाबले गिरावट
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच श्रीलंकाई मुद्रा पर भी लगातार दबाव बना हुआ है। श्रीलंका के केंद्रीय बैंक के अनुसार, मई के दौरान श्रीलंकाई रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेजी से कमजोर हुआ है।
मुद्रा के कमजोर होने का सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। चूंकि श्रीलंका अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है, इसलिए रुपये की गिरावट ने ईंधन की कीमतों पर और दबाव बढ़ा दिया है।
सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, कर्ज भी महंगा हुआ
सिर्फ पेट्रोल-डीजल पर ही देश में महंगाई की मार नहीं पड़ रही है, बल्कि वेस्ट एशिया संघर्ष का और भी खामियाजा श्रीलंका भुगत रहा है। हाल ही में श्रीलंका में महंगाई बढ़ने के बीच केंद्रीय बैंक को तीन साल बाद बड़ा फैसला लेना पड़ा।
श्रीलंका के केंद्रीय बैंक ने पॉलिसी रेट यानी नीतिगत ब्याज दरों में तगड़ी बढ़ोतरी करते हुए कर्ज महंगा कर दिया। बीते मंगलवार को ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट (1 फीसदी) की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद ये बढ़कर 8.75 फीसदी हो गई है। इससे पहले 2023 में आखिरी बार ब्याज दरों में इजाफा किया गया था।
श्रीलंका की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही
श्रीलंका पिछले कुछ सालों से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। 2022 में देश के दिवालिया होने के बाद हालात थोड़े सुधरे थे, लेकिन पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध ने एक बार फिर श्रीलंका की कमर तोड़ दी है।
तेल की बढ़ती कीमतों का असर देश की हर चीज पर पड़ रहा है – खाने-पीने की चीजों से लेकर परिवहन और उत्पादन तक। आम नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है और व्यापार ठप होने की कगार पर है।
भारत पर क्या असर?
श्रीलंका में तेल की कीमतों की यह स्थिति भारत के लिए भी चिंता का विषय है। हालांकि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम श्रीलंका जितने नहीं हैं, लेकिन वैश्विक तेल संकट का असर यहां भी देखने को मिल रहा है।
भारत सरकार ने हाल के महीनों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से बचने की कोशिश तो की है, लेकिन अगर कच्चे तेल के दाम ऐसे ही बढ़ते रहे तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। फिलहाल श्रीलंका के हालात भारत के लिए एक चेतावनी हैं कि अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुलता तो पूरे क्षेत्र में तेल संकट और गहरा सकता है।