भारत के लिए एक और बुरी खबर आई है। दुनिया के सबसे बड़े शेयर बाजारों की लिस्ट में इंडियन शेयर मार्केट एक पायदान और नीचे आ गया है। बीते दिनों दिल्ली से भी कम आबादी वाले देश ताइवान ने मार्केट वैल्यू के लिहाज से भारतीय बाजार को पीछे छोड़ा था।
अब साउथ कोरिया के शेयर बाजार ने भारत को पछाड़ दिया है और छठा सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट बन गया है, जबकि भारत अब सातवें पायदान पर खिसक गया है। यह दलाल स्ट्रीट के लिए बेहद कम समय में दूसरा बड़ा झटका है।
साउथ कोरिया का बाजार कितना बड़ा हो गया?
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों पर नजर डालें तो साउथ कोरियाई मार्केट में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन इस वर्ष 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। इसकी तुलना में भारतीय शेयर बाजार की वैल्यू कम होकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर रह गई है।
यानी साउथ कोरिया का शेयर बाजार अब भारत से लगभग 200 अरब डॉलर बड़ा हो गया है। यह अंतर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है, क्योंकि साउथ कोरिया के बाजार में तेजी अभी जारी है।
अर्थव्यवस्था दोगुनी, बाजार पीछे
शेयर बाजार की वैल्यू का यह अंतर इसलिए भी हैरान करने वाला है, क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था साउथ कोरिया की अर्थव्यवस्था से दोगुनी से भी बड़ी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों को देखें तो भारत की अर्थव्यवस्था इस वर्ष लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर होने की उम्मीद है।
वहीं दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए अनुमान 1.93 ट्रिलियन डॉलर है। यानी भारत की अर्थव्यवस्था साउथ कोरिया से दोगुने से भी ज्यादा है, लेकिन शेयर बाजार के मामले में साउथ कोरिया भारत से आगे निकल गया है।
ताइवान ने पहले ही कर दिया था पीछे
इससे पहले ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ा था और विश्व के 5वें सबसे बड़े शेयर बाजार का तमगा भारत से छीन लिया था। ताइवानी शेयर बाजार का मार्केट कैपिटलाइजेशन उस समय तेज बढ़ोतरी के साथ 4.95 ट्रिलियन डॉलर हो गया था, जो भारत के 4.92 ट्रिलियन डॉलर से अधिक था।
ताइवान की आबादी सिर्फ 2.3 करोड़ है, जो दिल्ली शहर की आबादी से भी कम है। लेकिन उसकी कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर ऐसा दबदबा बना लिया कि शेयर बाजार के मामले में वह भारत जैसे विशाल देश को पीछे छोड़ दिया।
AI ने कर दिया सबसे बड़ा खेल
भारत के साथ यह पूरा खेल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने किया है। AI के बढ़ते इस्तेमाल से साउथ कोरिया और ताइवान को जबरदस्त फायदा पहुंच रहा है और उनकी रैंकिंग में तगड़ा सुधार हो रहा है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स ने देश के शेयर बाजार में तेजी लाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। ये दोनों कंपनियां हाल ही में 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट-कैप क्लब में शामिल हुई हैं।
सैमसंग और SK हाइनिक्स का जलवा
सैमसंग और एसके हाइनिक्स एआई सिस्टम और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले मेमोरी चिप्स की प्रमुख सप्लायर्स हैं। दुनिया भर में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इन चिप्स की डिमांड आसमान छू रही है।
इसका सीधा फायदा इन कंपनियों के शेयरों को मिल रहा है। जब ये दोनों कंपनियां ही इतनी तेजी से बढ़ रही हैं, तो पूरे साउथ कोरियाई बाजार का मार्केट कैप अपने आप ही तेजी से बढ़ रहा है।
भारत क्यों पीछे रह गया?
जहां दक्षिण कोरिया और ताइवान को AI से जुड़े लाभ मिले हैं, वहीं भारतीय शेयर बाजार इस सेक्टर में संघर्ष कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऐसी कोई बड़ी लिस्टेड कंपनी नहीं है, जो ग्लोबल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से सीधे जुड़ी हो।
भारत के पास AI चिप्स बनाने वाली कोई दिग्गज कंपनी नहीं है। जबकि दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियां ताइवान (TSMC) और साउथ कोरिया (सैमसंग) में हैं। यही वजह है कि जब AI की लहर आई, तो इन देशों को सबसे पहले और सबसे ज्यादा फायदा मिला।
रुपया कमजोर, महंगाई बढ़ी, FPI बेच रहे
भारत पहले से ही कई मुश्किलों से जूझ रहा है। रुपये में लगातार गिरावट आ रही है। तेल की ऊंची कीमतों का दबाव बना हुआ है। महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगाड़ रखा है।
इन सबके बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं। जब निवेशक पैसे निकालेंगे, तो शेयर बाजार गिरेगा और मार्केट कैप घटेगा। यह वही पैसा है जो साउथ कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में जा रहा है।
क्या आगे और गिरावट आ सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भारत में AI सेक्टर में मजबूत कंपनियां नहीं खड़ी हुईं, तो रैंकिंग में और गिरावट आ सकती है। चीन और जापान जैसे बड़े बाजार पहले से ही भारत से आगे हैं। अब भारत को अपनी रैंकिंग बचाने के लिए तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा।
सरकार और निजी क्षेत्र को AI और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष ध्यान देना होगा। तभी भारत दोबारा टॉप-5 में वापसी कर सकता है, वरना और भी देश भारत को पीछे छोड़ सकते हैं।
भारत के पास क्या विकल्प है?
भारत के पास अब दो ही रास्ते हैं। पहला, AI और सेमीकंडक्टर में घरेलू कंपनियों को मजबूत करने के लिए नीतिगत बदलाव करना और दूसरा, विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीतने के लिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखना।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। एक बार जब दुनिया भर में AI की शुरुआती उछाल थम जाएगी, तो निवेशक फिर से अन्य बाजारों पर ध्यान देंगे और भारत वापसी कर सकता है। लेकिन अभी के लिए हालात चिंताजनक हैं।