भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वीकली रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 29 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान उसके सोने के भंडार की वैल्यू में 2.19 अरब डॉलर की गिरावट आई है। यह गिरावट काफी बड़ी है, जिसने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा।
RBI के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई तक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 112.60 अरब डॉलर थी। पिछले हफ्ते की तुलना में यह करीब 2 अरब डॉलर कम है।
अटकलों का बाजार गर्म
इस गिरावट से बाजार में यह अटकलें लगने लगीं कि RBI ने अपने सोने के भंडार का कुछ हिस्सा बेच दिया होगा। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के एक विश्लेषण में भी सुझाव दिया गया कि भंडार के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सोने की बिक्री हुई है।
इस विश्लेषण में कहा गया कि 22 मई को समाप्त होने वाले दो सप्ताह की अवधि के दौरान लगभग 12 अरब डॉलर वैल्यू के सोने की बिक्री हुई। इस खबर ने बाजार में हलचल मचा दी।
गवर्नर ने खारिज की अटकलें
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक का गोल्ड रिजर्व बरकरार है, बल्कि इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई है।
शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए मल्होत्रा ने साफ कहा कि ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है जिनमें यह सुझाया गया है कि RBI ने सोना बेचा है।
‘RBI ने सोना नहीं बेचा’
गवर्नर मल्होत्रा ने साफ शब्दों में कहा, ‘नहीं, RBI ने सोना नहीं बेचा है। हमारे सोने के भंडार में मामूली बढ़ोतरी हुई है।’
उन्होंने यह भी बताया कि सोने के भंडार में गिरावट खासतौर पर वैल्यू में बदलाव के कारण हुई है, न कि कीमती धातु की बिक्री के कारण। यानी सोने की मात्रा वही है, बस उसकी कीमत घट गई है।
वैल्यू क्यों घटी? समझिए गणित
सोने के भंडार अमेरिकी डॉलर में दर्ज किए जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमत के आधार पर हर सप्ताह इनका वैल्यूवेशन किया जाता है।
वैश्विक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा के परिवर्तन भंडार के रिपोर्ट किए गए मूल्य को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरती है, तो RBI के गोल्ड रिजर्व की वैल्युएशन भी गिर जाएगी, भले ही सोने की मात्रा वही हो।
सोने की भौतिक मात्रा अपरिवर्तित
RBI ने स्पष्ट किया कि उसके पास मौजूद सोने का फिजिकल रिजर्व 880.52 टन पर अपरिवर्तित है। यानी RBI ने न तो सोना बेचा है और न ही खरीदा है।
केंद्रीय बैंक ने इस बात पर जोर दिया कि सोने के भंडार के मूल्य में होने वाले उतार-चढ़ाव को वास्तविक भंडार में होने वाले बदलाव से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। यह लाभ और नुकसान भंडार प्रबंधन की एक नियमित प्रक्रिया है।
विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में हुई बढ़ोतरी
जहां गोल्ड रिजर्व की वैल्यू घटी, वहीं फॉरेन करेंसी असेट्स में बढ़ोतरी देखी गई। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक है।
इस सप्ताह के दौरान फॉरेन करेंसी असेट्स में 3.12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 546.15 अरब डॉलर हो गया। इस बढ़ोतरी ने देश की पूरी रिजर्व स्थिति को मजबूत करने में मदद की।
पीआईबी ने भी खबरों को बताया फर्जी
सरकार की सूचना जांच एजेंसी, प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भी सोने की बिक्री से जुड़ी खबरों को ‘फर्जी’ बताया। PIB ने साफ किया कि RBI ने कोई सोना नहीं बेचा है।
PIB ने RBI के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है।
सोने की हिस्सेदारी में लगातार बढ़ोतरी
RBI के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर 2025 के अंत में कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 फीसदी थी।
यह 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 फीसदी हो गई और 22 मई 2026 तक और बढ़कर 16.85 फीसदी हो गई। यानी RBI सोना बेचने के बजाय लगातार अपनी सोने की होल्डिंग्स बढ़ा रहा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर सवाल
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि RBI ने सोना बेचा है। इस रिपोर्ट के बाद बाजार में काफी असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी।
लेकिन RBI गवर्नर और PIB दोनों ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है। अब यह साफ हो गया है कि सोने की वैल्यू में गिरावट की वजह अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव है, न कि कोई बिक्री।
क्या है पूरी स्थिति?
अब स्थिति साफ है। RBI ने कोई सोना नहीं बेचा है। सोने के भंडार की भौतिक मात्रा 880.52 टन पर स्थिर है। जो गिरावट आई है, वह सिर्फ वैल्यूएशन में आई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें गिर गई हैं।
वहीं दूसरी तरफ, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल रिजर्व मजबूत हुआ है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी काफी मजबूत स्थिति में है।
निवेशकों के लिए क्या संदेश?
RBI का यह स्पष्टीकरण निवेशकों के लिए राहत की खबर है। अगर RBI सोना बेचता, तो यह एक बड़ा कदम होता, जिसके कई मायने हो सकते थे।
लेकिन अब साफ हो गया है कि RBI सोने के भंडार को लेकर अपनी रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया है। सोने में होने वाले उतार-चढ़ाव को सामान्य माना जाना चाहिए और इससे घबराने की जरूरत नहीं है।