मिडिल ईस्ट में जंग एक बार फिर शुरू हो गई है और अचानक ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है। ईरान-हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच ताबड़तोड़ मिसाइल अटैक ने क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से आग लगा दी है।
इससे सहमे दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम मच गया है। निवेशकों ने घबराकर अपनी पोजीशन बेचनी शुरू कर दी, जिससे बाजार लुढ़क गए।
पहले से ही गहराया है तेल संकट
ईरान-इजरायल जंग ने पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल-गैस संकट को और भी बढ़ा दिया है। दुनिया के तमाम देशों की चिंता बढ़ गई है।
ईरान ने अब एक नई धमकी दे डाली है, जो और भी डराने वाली है। इजरायल के मिसाइल अटैक के बाद ईरान ने कहा है कि अगर हमला बढ़ा तो वह एक और अहम समुद्री रास्ता बंद कर सकता है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में लगी आग
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। इस बीच ईरान-इजरायल में भीषण जंग की शुरुआत हो गई, जिसने मिडिल ईस्ट तनाव को फिर से हाई पर पहुंचा दिया।
इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 5 फीसदी उछलकर 98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई।
WTI क्रूड ऑयल का दाम भी जोरदार तेजी लेते हुए 95 डॉलर प्रति बैरल पर जा पहुंचा। यह उछाल इतना तेज था कि बाजार के जानकार भी हैरान रह गए।
महंगाई का खतरा बढ़ा
कच्चे तेल की कीमतों में लगी इस आग ने दुनिया में एक बार फिर से महंगाई का जोखिम बढ़ा दिया है। तेल की बढ़ती कीमतों का असर हर चीज पर पड़ता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, परिवहन लागत बढ़ेगी, और फिर खाने-पीने की चीजों के दाम भी आसमान छूएंगे। यह एक ऐसा चक्र है जिससे बचना मुश्किल है।
दुनिया के शेयर बाजार क्रैश
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के असर से जापान, कोरिया से हांगकांग तक के शेयर बाजार सोमवार को क्रैश हो गए हैं। निवेशकों ने घबराकर बिकवाली शुरू कर दी।
यह गिरावट इतनी तेज थी कि कई एक्सचेंजों पर सर्किट तक लग गए। कारोबार को रोकना पड़ा। यह दर्शाता है कि निवेशक कितने डरे हुए हैं।
ईरान ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
इजरायल की ओर से ईरान पर कड़ी जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल अटैक किए गए। इस हमले के बाद ईरान ने दुनिया की टेंशन बढ़ाने वाली चेतावनी दे डाली।
ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली वेलायती ने होर्मुज स्ट्रेट की तरह ही जरूरी समुद्री रास्ते बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर यह वॉर्निंग दी है।
बाब-अल-मंदेब क्यों है अहम?
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट यमन, जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है। यह यूरोप, एशिया और अरब देशों के बीच ट्रेड के लिए बेहद जरूरी है।
इसे स्वेज कैनाल का एंट्री पॉइंट माना जाता है। यह तमाम देशों में तेल-गैस की आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है और एशिया से यूरोप जाने वाले जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं।
‘दुश्मन गलतफहमी में न रहे’
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, वेलायती ने साफ कहा कि, ‘मौजूदा हालात को देखकर दुश्मन गलतफहमी में न रहे। इजरायल के पास दो रास्ते हैं, या तो वह अपनी बेवकूफी रोक दे या फिर ऐसे हालात का सामना करे जहां दो अहम समुद्री रास्तों पर संतुलित जवाब मिल सकता है।’
ईरानी नेता का साफ इशारा समुद्री आवाजाही पर दबाव बढ़ाने की ओर है। यानी अगर इजरायल ने हमले जारी रखे तो ईरान पीछे नहीं हटेगा।
होर्मुज से पहले से है संकट
मिडिल ईस्ट में नए सिरे से शुरू हुई इस जंग ने दुनिया के तमाम देशों की टेंशन बढ़ा दी है। अमेरिका से तनाव के बीच ईरान ने पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है।
होर्मुज दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी सप्लाई के लिए जरूरी है। उसके बंद होने से पाकिस्तान, ब्रिटेन, श्रीलंका से लेकर भारत तक में तेल-गैस का संकट गहराया हुआ है।
बाब-अल-मंदेब बंद होने से और बढ़ेगा संकट
अब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की ईरानी धमकी इस संकट को गहराने वाली साबित हो सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समुद्री रूट पर दबाव का असर दुनिया के व्यापार और तेल सप्लाई पर पड़ेगा।
हर रोज लाखों बैरल कच्चा तेल और अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स इस समुद्री रास्ते से गुजरते हैं। इसके बंद होने से यूरोपीय देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।
किन देशों की बढ़ेगी मुसीबत?
खाड़ी देशों का तेल बाब-अल-मंदेब रास्ते से यूरोपीय संघ (EU) के देशों, इटली, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और ब्रिटेन तक पहुंचता है।
इसके बंद होने से इन तमाम देशों में मुसीबत बढ़ सकती है। तेल की सप्लाई ठप हो जाएगी और कीमतें आसमान छूएंगी। यूरोप पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, ऐसे में यह नई मुसीबत उसके लिए बड़ा झटका होगी।
क्या ईरान के काबू में है यह रास्ता?
व्यावहारिक रूप से बाब-अल-मंदेब ईरान के नियंत्रण में नहीं है, लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का यमन के कुछ हिस्सों पर प्रभाव है।
ये हूती विद्रोही तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही बाधित करके दुनिया में तेल-गैस का संकट बढ़ा सकते हैं। पहले भी वे इस तरह के हमले कर चुके हैं।
भारत पर क्या असर होगा?
भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज और बाब-अल-मंदेब, दोनों ही भारत के लिए अहम समुद्री रास्ते हैं।
अगर ये रास्ते बंद हुए, तो भारत में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और महंगाई बढ़ेगी। सरकार के लिए राहत देना मुश्किल हो जाएगा। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संकट से कैसे निपटती है।