‘ऑपरेशन हुआ है, कुछ दिन दर्द तो होगा’, पेट में छोड़ा नैपकिन, 14 दिन तक तड़पती रही प्रसूता; शिकायत करने पर डॉक्टरों ने झाड़ा पल्ला खरगोन जिला अस्पताल में डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही, इंदौर के निजी अस्पताल में दूसरी सर्जरी के दौरान हुआ खुलासा, कलेक्टर ने जांच दल गठित किया
मध्य प्रदेश के खरगोन (Khargone) जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल (district hospital) में गंभीर लापरवाही (medical negligence) सामने आई है। एक महिला के सीजर ऑपरेशन (C-section surgery) के दौरान डॉक्टरों ने प्रसूता के पेट में सर्जिकल नैपकिन (surgical napkin) छोड़ दिया और टांके लगा दिए।
14 दिन बाद हुआ खुलासा
14 दिन (14 days) बाद इंदौर (Indore) के निजी अस्पताल (private hospital) में दोबारा ऑपरेशन (re-surgery) के दौरान यह गंभीर चूक सामने आई। महिला फिलहाल आईसीयू (ICU) में भर्ती है। कलेक्टर (Collector) ने जांच दल (inquiry team) गठित कर जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
क्या है पूरा मामला?
भीकनगांव थाना इलाके के सेल्दा निवासी महिला मनीषा (Manisha) , पति विनोद घोरमाड़े (Vinod Ghormade), को प्रसव पीड़ा (labor pain) होने पर 16 मार्च (March 16) को भीकनगांव अस्पताल लाया गया। यहां गंभीर हालत होने पर जिला अस्पताल खरगोन (District Hospital Khargone) रेफर (referred) किया गया।
17 मार्च (March 17) को डॉक्टर मोहित गुप्ता (Dr. Mohit Gupta) की टीम ने सीजर ऑपरेशन किया और महिला ने बच्चों को जन्म दिया। ऑपरेशन के दौरान रक्त प्रवाह (blood flow) को रोकने के लिए इस्तेमाल किया गया सर्जिकल नैपकिन (surgical napkin) डॉक्टर महिला के पेट के अंदर ही भूल गए और ऊपर से टांके लगा दिए। 21 मार्च (March 21) को महिला के अस्पताल से छुट्टी (discharged) दे दी गई।
दर्द से तड़पती रही प्रसूता
परिवार के अनुसार, ऑपरेशन के बाद प्रसूता मनीषा को लगातार पेट दर्द (continuous abdominal pain) होता रहा। अस्पताल लाने पर डॉक्टर ने यह कहकर टाल दिया कि “ऑपरेशन हुआ है, कुछ दिन दर्द तो होगा (pain will occur for a few days)” । घर पहुंचने के बाद यह दर्द और असहनीय हो गया। फिर जिला अस्पताल ले गए, लेकिन किसी ने इस बार भी ध्यान नहीं दिया।
इंदौर के निजी अस्पताल में हुआ खुलासा
हालत बिगड़ने पर विनोद अपनी पत्नी को एमवायएच इंदौर (MY Hospital Indore) ले गया। वहां भी ध्यान नहीं देने पर इंदौर के निजी अस्पताल (private hospital) में भर्ती करवाया। यहां जांच (investigation) में पेट के अंदर कोई वस्तु (foreign object) होने की पुष्टि हुई।
21 मार्च को दोबारा सर्जरी (re-surgery) हुई तो पेट के अंदर से सर्जिकल नैपकिन (surgical napkin) निकाला गया। परिजनों ने कहा कि इलाज में उनके दो लाख रुपये (Rs 2 lakh) खर्च हो गए और मनीषा अब भी आईसीयू (ICU) में है।
कलेक्टर ने दिए जांच आदेश
मामले की सूचना डीएम (DM) तक पहुंची तो कलेक्टर भव्या मित्तल (Bhavya Mittal) ने तीन सदस्यीय जांच दल (three-member inquiry team) गठित कर दिया और शीघ्र ही जांच रिपोर्ट (inquiry report) देने के लिए कहा। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दोषी डॉक्टर और टीम पर कार्रवाई (action) की जाएगी।