धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय में भूचंप – छात्रों का आंदोलन, विपक्ष हमलावर, सरकार ने किया अंतरिम इंतजाम
नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के 24 घंटे बाद आज 27 जुलाई को देश की राजनीति सबसे ज्यादा इसी मुद्दे पर गरम है। शनिवार को अचानक दिए गए इस्तीफे के बाद सरकार ने रविवार को वित्त मंत्री को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। लेकिन छात्रों का आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा और विपक्ष ने इसे “सरकार की नाकामी” बताकर संसद में बड़ा घमासान छेड़ने का ऐलान कर दिया है।
क्या हुआ था? धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार 26 जुलाई की शाम प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफे की वजह आधिकारिक तौर पर “निजी कारण” बताई गई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में 3 बड़े मुद्दे चर्चा में हैं:
1. छात्रों का राष्ट्रव्यापी आंदोलन
पिछले 10 दिन से NEET-PG, CUET और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर देश भर के छात्र सड़कों पर हैं। दिल्ली, पटना, लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता में बड़े प्रदर्शन हुए। छात्रों का आरोप है कि पेपर लीक, काउंसलिंग में देरी और फीस बढ़ोतरी के कारण लाखों छात्रों का भविष्य अधर में है। विपक्ष ने इसे “CJP प्रोटेस्ट” का नाम दिया है।
2. CAG और संसदीय समिति की रिपोर्ट
जुलाई की शुरुआत में CAG की रिपोर्ट में राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठे थे। संसदीय स्थायी समिति ने भी डिजिटल शिक्षा और स्कूलों के बुनियादी ढांचे में देरी पर कड़ी टिप्पणी की थी।
3. 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी
ओडिशा में अगले साल चुनाव हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान को संगठन की जिम्मेदारी देने के लिए ये कदम उठाया गया है।
सरकार की तुरंत प्रतिक्रिया – अंतरिम व्यवस्था
इस्तीफा मिलते ही प्रधानमंत्री कार्यालय एक्शन में आया।
1. अतिरिक्त प्रभार : रविवार सुबह वित्त मंत्री को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा “किसी भी योजना और बजट का काम नहीं रुकेगा।”
2. PM की अपील : प्रधानमंत्री ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा “सरकार आपकी हर समस्या सुनेगी। नई शिक्षा नीति युवाओं के भविष्य के लिए है।”
3. नई समिति का गठन : शिक्षा मंत्रालय ने पेपर लीक रोकने और परीक्षा सुधार के लिए 7 सदस्यीय “राष्ट्रीय परीक्षा सुधार समिति” बना दी है। रिपोर्ट 30 दिन में मांगी गई है।
विपक्ष का हमला – “नैतिक जिम्मेदारी तय हुई”
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने सरकार को घेर लिया है।
कांग्रेस: राहुल गांधी ने X पर लिखा “छात्रों के आंदोलन और CAG रिपोर्ट के बाद आखिरकार नैतिक जिम्मेदारी तय हुई। लेकिन सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे से समस्या नहीं सुलझेगी। सरकार को NEET और CUET रद्द करके नए सिरे से परीक्षा करानी चाहिए।”
TMC और AAP : दोनों दलों ने संसद के मानसून सत्र में “शिक्षा संकट” पर चर्चा की मांग की है। ममता बनर्जी ने कहा “ये इस्तीफा सरकार की नाकामी की स्वीकारोक्ति है।”
वाम दल: उन्होंने इसे “शिक्षा के भगवाकरण” के खिलाफ छात्रों की जीत बताया।
विपक्ष 28 जुलाई से शुरू हो रहे संसद सत्र में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है।
छात्रों और शिक्षकों की क्या मांग है?
इस्तीफे के बावजूद दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के 20 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में छात्र धरने पर बैठे हैं।
छात्रों की 5 मुख्य मांगें:
1. NEET-PG और CUET में हुई गड़बड़ी की CBI जांच
2. काउंसलिंग प्रक्रिया तुरंत शुरू हो
3. सरकारी स्कूल-कॉलेजों की फीस न बढ़े
4. नई शिक्षा नीति में छात्रों और शिक्षकों से राय ली जाए
5. शिक्षा बजट GDP का 6% किया जाए
JNU, DU और BHU के प्रोफेसर संघ ने भी सरकार से बातचीत की मांग की है।
बीजेपी के अंदर क्या स्थिति है?
बीजेपी में इसे “संगठनात्मक बदलाव” के रूप में देखा जा रहा है।
1. ओडिशा फोकस: धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा चुनाव का प्रभारी बनाया जा सकता है। वो वहां पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हैं।
2. नए मंत्री कौन? दिल्ली में 3 नाम चर्चा में हैं – एक वरिष्ठ महिला सांसद, एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक टेक्नोक्रेट। अंतिम फैसला PM की विदेश यात्रा से लौटने के बाद होगा।
3. आरएस की राय: संघ ने कहा है “शिक्षा नीति अच्छी है, लेकिन जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में दिक्कत है। उसे ठीक करना होगा।”
आगे क्या होगा? 3 बड़े सवाल
1. क्या आंदोलन खत्म होगा?
छात्र नेताओं का कहना है “इस्तीफा काफी नहीं है। जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती, आंदोलन जारी रहेगा।” सरकार ने 29 जुलाई को छात्र प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है।
2. NEP 2020 का क्या होगा?
NEP के तहत 3-भाषा फॉर्मूला, 4 साल का डिग्री कोर्स और मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू होने हैं। नए मंत्री के आने पर इसकी गति धीमी पड़ सकती है।
3. संसद में हंगामे के आसार
विपक्ष ने तय किया है कि वो शिक्षा, महंगाई और बेरोजगारी को मिलाकर सरकार के खिलाफ “संयुक्त मोर्चा” बनाएगा।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. सुदीप्तो का कहना है “ये इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री का नहीं है। ये 2024 के बाद सरकार के सामने पहली बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। अगर सरकार छात्रों को मना नहीं पाई तो इसका असर 2026 के चुनावों पर पड़ेगा।”
शिक्षा विशेषज्ञ का मानना है “नीति अच्छी है लेकिन संवाद की कमी है। नए मंत्री को पहले छात्रों का भरोसा जीतना होगा।”
निष्कर्ष
27 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ एक कैबिनेट बदलाव नहीं है। ये देश के 4 करोड़ छात्रों के भविष्य, शिक्षा नीति के भविष्य और सरकार की छवि से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
सरकार ने फायर फाइटिंग तो कर ली है, लेकिन असली परीक्षा अब संसद और सड़क दोनों जगह है। अगले 7 दिन तय करेंगे कि ये संकट अवसर में बदलेगा या सरकार के लिए सिरदर्द बनेगा।
– Lakshmi Sharma