अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकाने पिकैक्स माउंटेन पर हमले का संकेत दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने कोई गलत कदम उठाया तो अमेरिका बहुत कड़ा हमला करेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और युद्ध सात महीने से जारी है।
ट्रंप की चेतावनी
बुधवार को डलास में मिडटर्म रिपब्लिकन कन्वेंशन में भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम पिकैक्स पर थोड़ी गतिविधि देख रहे हैं। मैं ईरान को सलाह दूंगा कि ज्यादा चालाकी न करे, क्योंकि हमें वहां बहुत जोरदार हमला करना पड़ सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका वहां हो रही हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है। ट्रंप जुलाई के मध्य से ही पिकैक्स माउंटेन पर हमले की धमकी देते आ रहे हैं।
पिकैक्स माउंटेन क्या है?
पिकैक्स माउंटेन ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 140 मील दक्षिण में स्थित है। यह नतांज परमाणु परिसर से सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी पर है। यह एक किलेबंद पहाड़ी क्षेत्र है जहां जमीन के काफी नीचे दो सुरंग परिसर मौजूद हैं।
यह साइट ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे बनी हुई है, जिसके कारण इसे नष्ट करना बेहद मुश्किल माना जाता है। यहां तक कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बंकर-बस्टिंग बमों के लिए भी यह चुनौतीपूर्ण है।
निर्माण गतिविधियों में तेजी
वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने छह साल के सैटेलाइट चित्रों का विश्लेषण किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण गतिविधियों में “स्पष्ट उछाल” देखा गया है।
विश्लेषकों ने बताया कि ईरान ने साइट के चारों ओर सुरक्षा परिधि बनाई है। सड़कों का जाल बिछाया गया है और सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मजबूत किया गया है। 2026 में इस साइट पर अब तक की सबसे अधिक सड़क गतिविधि देखी गई है।
परमाणु कार्यक्रम से संबंध
पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह साइट ईरान के घोषित नहीं किए गए यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के लिए बनाई जा रही है। इजरायली खुफिया जानकारी के मुताबिक, ईरान पिछले साल से यहां सेंट्रीफ्यूज और उनके पुर्जे पहुंचा सकता है।
हालांकि, CSIS का कहना है कि वे इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं कर सकते। उनके मुताबिक, निर्माण गतिविधियों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि यहां अभी यूरेनियम संवर्धन शुरू हो चुका है।
नतांज पर पहले हुए हमले
नतांज ईरान का अहम यूरेनियम संवर्धन केंद्र है। मार्च में अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के दौरान यहां मौजूद दो यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों को निशाना बनाया गया था। पिछले साल 12 दिन चली इजरायल-ईरान जंग के दौरान भी नतांज पर हमला हुआ था।
इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के मुताबिक, पिकैक्स माउंटेन के नीचे बन रहा सुरंग परिसर इन दोनों युद्धों में निशाना नहीं बना। यही कारण है कि ट्रंप की ताजा चेतावनी को काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिका की रणनीति
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने हाल ही में कहा कि ईरान के साथ परमाणु समझौता शायद नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमता को नष्ट कर सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका गहराई में छिपे ठिकानों पर हमला करने के लिए नई तकनीक विकसित कर रहा है। पेंटागन “नेक्स्ट जनरेशन पेनेट्रेटर” नाम के हथियार पर काम कर रहा है जो मौजूदा बंकर-बस्टर बमों से भी ज्यादा गहराई तक जा सके।
IAEA की चिंता
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने चिंता जताई है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों का निरीक्षण नहीं करा रहा है। एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने कहा कि ईरान को तत्काल निरीक्षकों को अनुमति देनी चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास 440.9 किलोग्राम यूरेनियम 60 प्रतिशत तक संवर्धित है, जो हथियार बनाने के लिए काफी करीब माना जाता है। जून 2025 से IAEA के निरीक्षकों को ईरान के किसी भी परमाणु ठिकाने तक पहुंच नहीं मिली है।
युद्ध की स्थिति
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच यह युद्ध फरवरी 2026 से जारी है। जून में एक अंतरिम समझौता हुआ था, लेकिन वह जल्दी ही टूट गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार झड़पें हो रही हैं, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
ट्रंप ने कहा है कि युद्ध नवंबर में अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद खत्म हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
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आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि पिकैक्स माउंटेन पर हमला तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। ग्रेनाइट की मोटी परत के कारण यह ईरान का सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकाना माना जा रहा है। अगर अमेरिका हमला करता है तो यह संघर्ष में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
ईरान ने अब तक ट्रंप की ताजा चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है