नई दिल्ली | भारत की प्रमुख सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने जहाज निर्माण के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक टेंडर जारी किया है। कंपनी 720 मिलियन डॉलर (करीब 6,858 करोड़ रुपये) की लागत से 6 आधुनिक कंटेनर जहाजों (8,000 टीईयू क्षमता) के निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा आमंत्रित की है। इस कदम को ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और भारत की समुद्री परिवहन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
क्या है टेंडर की खास बात?
- जहाज: 6 सेल्युलर कंटेनर पोत, प्रत्येक की क्षमता 8,000 टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) होगी। टीईयू कंटेनर जहाजों की माल ढुलाई क्षमता मापने की मानक इकाई है।
- ऑर्डर: छह में से दो जहाजों का ऑर्डर पक्का होगा, जबकि शेष चार जहाज वैकल्पिक श्रेणी में रखे गए हैं, जिससे भविष्य की जरूरतों के अनुसार ऑर्डर बढ़ाने की सुविधा होगी।
- घरेलू प्राथमिकता: टेंडर में भारतीय शिपयार्ड्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। ‘राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल’ (ROFR) व्यवस्था के तहत, यदि किसी विदेशी कंपनी की बोली सबसे कम होती है, तो योग्य भारतीय शिपयार्ड को उस कीमत का मिलान करने का अवसर दिया जाएगा।
घरेलू शिपयार्ड्स को क्या लाभ?
- तकनीकी साझेदारी: अनुभवहीन भारतीय शिपयार्ड भी अनुभवी विदेशी जहाज निर्माताओं के साथ तकनीकी साझेदारी कर इस टेंडर में भाग ले सकते हैं।
- वित्तीय सहायता: यह परियोजना केंद्र सरकार की 24,736 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (SB FAS) के दायरे में आती है, जिसके तहत प्रत्येक जहाज के निर्माण पर 15 से 25 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता मिलेगी।
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क्यों है यह पहल अहम?
यह टेंडर सरकार के 69,725 करोड़ रुपये के समुद्री क्षेत्र पैकेज का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घरेलू शिपयार्ड्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस परियोजना से भारत की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को मजबूती मिलेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।