देश में अगले साल से 10 रुपये और 20 रुपये की वैल्यू वाले पॉलिमर या प्लास्टिक के करेंसी नोट देखने को मिल सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इसकी तैयारी कर ली है।
RBI इस प्रोजेक्ट के तहत भाग लेने के लिए ग्लोबल आपूर्तिकर्ताओं को आमंत्रित करके एक पायलट रोलआउट की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है और ग्लोबल स्तर पर आवेदन मांगे गए हैं।
68,000 रीम पॉलिमर सब्सट्रेट की मांग
प्रक्रिया के तहत RBI की सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट प्रिंटिंग प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने सुरक्षा सुविधाओं से लैस ट्रांसपैरेंट पॉलिमर सब्सट्रेट शीट की आपूर्ति के लिए ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) जारी की है।
EOI में ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) बेस्ड पॉलिमर सब्सट्रेट की 68,000 रीम की मात्रा मांगी गई है, जिसमें से 34,000 रीम दो अलग-अलग करेंसी के लिए रिजर्व हैं। प्रत्येक रीम में 500 शीट होती हैं।
कैसी होगी सुरक्षा?
सब्सट्रेट में कई खास सुरक्षा विशेषताएं होंगी। इनमें पोर्ट्रेट के साथ विंडो, मेटल नंबर, चुंबकीय धागा, छाया छवि और इंद्रधनुषी पैटर्न शामिल हैं।
ये सुविधाएं BRBNMPL और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SPMCIL) की प्रिंटिंग प्रेस में छपाई के लिए उपयुक्त होंगी।
किन देशों को रखा गया बाहर?
टेंडर प्रक्रिया में कड़ी सुरक्षा शर्तें भी शामिल हैं। बोलीदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि चीन या पाकिस्तान में उनका संचालन भारत से संबंधित कार्यों से पूरी तरह अलग हो।
वे इन दोनों देशों से कच्चा माल न खरीदें, और परियोजना के लिए ऐसे कर्मियों को तैनात न करें जिन्होंने पहले चीन या पाकिस्तान में काम किया हो।
टेंडर में 3 साल का अनुभव अनिवार्य
योग्य बोलीदाताओं के पास केंद्रीय बैंक या नोट प्रिंटिंग संगठन को सुरक्षा सुविधाओं से युक्त पॉलिमर सब्सट्रेट की आपूर्ति करने का कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए।
आवेदकों को लैब टेस्टिंग के लिए पॉलिमर शीट के नमूने भी जमा करने होंगे, साथ ही यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि सामग्री में पशु वसा और डीएनए की मात्रा नहीं है।
कब आ सकते हैं नोट?
व्यापक स्तर पर इन नोटों को जारी करने का फैसला फील्ड ट्रायल के परिणामों पर निर्भर करेगा। अगर टेस्टिंग सफल होती है, तो साल 2027 में पूर्ण पैमाने पर इन्हें प्रचलन में लाया जा सकता है।
बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त है। मौजूदा खरीद सिर्फ तत्काल आवश्यकता के लिए है।
प्लास्टिक नोट के क्या फायदे हैं?
पॉलिमर से बने नोट, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार 1988 में पेश किया था, अब 50 से अधिक देशों में उपयोग किए जाते हैं।
इन्हें पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में अधिक टिकाऊ, नकली नोट बनाने में मुश्किल और लंबी आयु वाला माना जाता है, जिससे छपाई की लंबी अवधि की लागत कम आती है।