नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले 12 वर्षों में न केवल सत्ता के शीर्ष पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि अपनी वैचारिक दिशा, संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति में ऐसे बदलाव किए हैं, जिन्होंने देश की राजनीति का पूरा नक्शा बदल दिया है। एक समय मुख्य रूप से ‘सवर्ण-आधारित’ और ‘ब्राह्मण-बनिया’ पार्टी मानी जाने वाली बीजेपी अब दलित, ओबीसी और आदिवासी वोटरों तक अपनी गहरी पैठ बना चुकी है और फिलहाल 21 राज्यों में एनडीए की सरकारें हैं। इस बदलाव का श्रेय ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ और ‘लाभार्थी वर्ग’ की नई सोशल इंजीनियरिंग को जाता है।
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PM Modi ने कैसे तोड़ा जातीय पैटर्न?
- पारंपरिक राजनीति से अलग: मोदी की राजनीति पारंपरिक ढर्रे से हटकर अपनी अलग लकीर खींचती है। गुजरात के सीएम रहते हुए उन्होंने राज्य में बीजेपी की जड़ें ऐसी जमाईं कि कांग्रेस दोबारा उभर नहीं पाई।
- जातिवाद का अंत: मोदी ने जातिवादी राजनीति के ढर्रे को, खासकर हिंदी भाषी राज्यों में, ध्वस्त कर दिया। अमित शाह ने इसे ‘जातिवादी राजनीति के अंत’ की घोषणा कहा था।
- लाभार्थी वर्ग: उन्होंने विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं (लाभार्थी वर्ग) को अपना मुख्य राजनीतिक एजेंडा बनाया, जिससे वे कास्ट पॉलिटिक्स को काउंटर करने में सफल रहे।
- सोशल इंजीनियरिंग: मोदी ने ओबीसी, दलित, पसमांदा और बोहरा मुसलमानों को जोड़ने का मंत्र दिया और अलग-अलग जातीय समूहों को पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक में हिस्सेदारी दी।
हिंदुत्व-राष्ट्रवाद के एजेंडे से लिखी नई इबारत
- वैचारिक एजेंडा: अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन और प्राण-प्रतिष्ठा, अनुच्छेद 370 को हटाना, ट्रिपल तलाक को खत्म करना – ये सभी मोदी सरकार के मुख्य वैचारिक एजेंडे का हिस्सा रहे।
- राष्ट्रवाद: उरी और बालाकोट के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक तथा आतंकवाद के खिलाफ सख्त अभियानों ने राष्ट्रवाद को नई परिभाषा दी।
- सांस्कृतिक पहचान: राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना, नौसेना के नए ध्वज में छत्रपति शिवाजी महाराज की राजमुद्रा शामिल करना, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक और केदारनाथ-बद्रीनाथ के पुनर्विकास जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में हैं।
बीजेपी का कैसे बढ़ता गया सियासी कारवां?
- 2014: जब मोदी के नेतृत्व में बीजेपी केंद्र की सत्ता में आई, तब कई राज्यों में उसकी अपनी सरकारें नहीं थीं और दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत में पार्टी की मौजूदगी कमजोर थी।
- 2018: आते-आते उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, असम और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में पार्टी या उसके सहयोगियों की सरकारें बन चुकी थीं। पार्टी ने बूथ और ‘पन्ना’ स्तर तक संगठन मजबूत किया।
- 2026: देश का राजनीतिक नक्शा काफी हद तक बदल चुका है। बंगाल और ओडिशा में भी बीजेपी सत्ता में है और कई ऐसे राज्य, जहां कभी पार्टी की उपस्थिति बेहद कम थी, वहां भी वह मुख्य खिलाड़ी बन चुकी है।
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PM Modi ने कैसे बदली देश की राजनीति?
- हाईटेक प्रचार: 2014 के चुनाव से पहले मोदी ने 3D होलोग्राम कैंपेन लॉन्च किया, जिससे चुनावी माहौल पूरी तरह आधुनिक और हाईटेक हो गया।
- अल्पसंख्यक वोट बैंक से हटकर: 2014 से पहले ज्यादातर दलों का फोकस अल्पसंख्यक वोट बैंक पर था, लेकिन मोदी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की छतरी के नीचे समाज को एकजुट कर सियासी खेल पलट दिया।
- विपक्ष पर असर: इस बदलाव के चलते राहुल गांधी को भी अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ी और उन्होंने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ , पूर्वोत्तर से मुंबई तक की यात्रा और बिहार में ‘वोट अधिकार यात्रा’ जैसे कार्यक्रम किए। खुद को सेकुलर कहने वाले नेता भी अब मंदिरों में माथा टेकते नजर आते हैं।