नासिक के चर्चित TCS केस में बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने चार आरोपियों के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी है। यह मामला एक मल्टीनेशनल कंपनी टीसीएस (TCS) में कार्यरत महिला कर्मचारी से कथित छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, अब तक इस मामले में कुल 9 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं। ये मामले नासिक के देवलाली कैंप और मुंबई नाका थानों में दर्ज कराए गए हैं।
किन-किन पर दाखिल हुई चार्जशीट?
SIT ने जिन चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, उनके नाम हैं:
- दानिश इजाज शेख
- तौसीफ बिलाल अत्तार
- निदा इजाज खान
- मतीन माजिद पटेल
सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने पहले ही इनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
SIT जांच में क्या-क्या सामने आया?
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के आदेश पर गठित SIT ने बहुआयामी जांच की। चार्जशीट में शामिल अहम सबूत इस प्रकार हैं:
- 17 गवाहों के बयान: ये बयान प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज कराए गए हैं।
- मेडिकल रिपोर्ट: पीड़िता और आरोपियों दोनों की मेडिकल जांच रिपोर्ट को सबूत के तौर पर शामिल किया गया है।
- डिजिटल सबूत: व्हाट्सएप चैट्स के स्क्रीनशॉट, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल ट्रेल को जांच में अहम माना जा रहा है।
- दस्तावेजी सबूत: आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़िता के मूल दस्तावेज़ (पहचान पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि) अपने पास रख लिए थे, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया। साथ ही बैंक लेनदेन और वाहन से जुड़े कागजात भी जांच में शामिल हैं।
धर्मांतरण के प्रयास के भी गंभीर आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़िता पर जबरन धर्म बदलने के लिए दबाव डाला और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। पुलिस के मुताबिक, यह कोई अलग-थलग वारदात नहीं, बल्कि एक आपराधिक साजिश के तहत अंजाम दी गई योजना थी। इसमें पीड़िता की पहचान बदलने और आर्थिक धोखाधड़ी जैसे पहलू भी शामिल हैं।
आगे क्या?
पुलिस ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है। अगर और सबूत मिलते हैं, तो पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। मुंबई नाका थाने में दर्ज अन्य 8 मामलों की भी जांच चल रही है, जिन्हें भी जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा।
फिलहाल, यह मामला विशेष अदालत में पहुंच चुका है, और आने वाले दिनों में सुनवाई के दौरान कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। इस केस ने नासिक में सामाजिक और कानूनी बहस को जन्म दे दिया है।