जंग के साये में समंदर बना मौत का रास्ता, अंधेरे में बिना सिग्नल जहाज लेकर स्ट्रेट पार करने की मजबूरी, भारतीय कप्तान ने सुनाई खौफनाक आंखों देखी कहानी
दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में से एक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) इस समय जंग के साये में है। तेल और गैस की सप्लाई के लिए बेहद जरूरी यह रास्ता पिछले एक महीने से खतरे में है। वहां फंसे भारतीय नाविकों (Indian sailors) के अनुभव हालात की भयावह तस्वीर सामने ला रहे हैं।
अंधेरे में सफर की मजबूरी
लल्लनटॉप (Lallantop) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक भारतीय मर्चेंट नेवी अधिकारी (merchant navy officer) ने बताया कि कई कंपनियां अपने जहाजों पर दबाव (pressure) बना रही हैं कि वे अपना सिग्नल बंद (signal off) कर दें और स्ट्रेट पार करने की कोशिश करें। हालात इतने खराब हैं कि कई जहाज पूरी तरह अंधेरे (darkness) में यह रास्ता पार करने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ जहाज AIS (Automatic Identification System) बंद कर देते हैं, जो जहाज की लोकेशन और नेविगेशन (navigation) के लिए बेहद जरूरी होता है। AIS बंद होने पर जहाज चार्ट और कंपास (chart and compass) के सहारे रास्ता तय करते हैं। यानी यह सफर अब तकनीक नहीं, बल्कि किस्मत (luck) के भरोसे चल रहा है।
छोटी कंपनियों का दबाव
मर्चेंट नेवी अधिकारी ने बताया कि छोटी कंपनियां (small companies) अपने कर्मचारियों पर जोखिम लेने का दबाव बना रही हैं। यहां तक कि उन्हें भविष्य में नौकरी न देने की धमकी (threat of job loss) भी दी जा रही है। जो नाविक अभी घर पर हैं, वे अब समुद्र में जाने से बच रहे हैं।
‘1 मिनट में 100 से ज्यादा धमाके’
इंडिया टुडे (India Today) से बात करते हुए कैप्टन राम कपूर (Captain Ram Kapoor) ने इस रास्ते की भयावहता बताई। उन्होंने कहा कि पर्शियन गल्फ (Persian Gulf) में बढ़ते संघर्ष के बीच यह इलाका दुनिया के सबसे खतरनाक शिपिंग रूट्स (most dangerous shipping routes) में बदल चुका है।
करीब 28 साल (28 years) से समुद्र में काम कर रहे इस कप्तान ने बताया, “हमारे सिर के ऊपर से मिसाइलें गुजरती रहती हैं। 30-40 मिनट में 120 से 130 धमाके (120-130 blasts) हुए। हर पल ऐसा लगता है कि अगला धमाका हमारे जहाज के पास होगा।”
3000 से ज्यादा जहाज फंसे
उन्होंने यह भी बताया कि उनका जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास खड़ा है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है। लेकिन फिलहाल 3000 से ज्यादा जहाज (over 3000 ships) वहीं फंसे हुए हैं और भारी मात्रा में कच्चा तेल (crude oil) दुनिया तक नहीं पहुंच पा रहा है।
‘हम ग्लोबल ट्रेड की रीढ़ हैं’
कप्तान के मुताबिक, उनकी चार महीने की ड्यूटी अब पांच महीने से ज्यादा (more than 5 months) हो चुकी है। उन्होंने कहा, “हम ग्लोबल ट्रेड की रीढ़ (backbone of global trade) हैं, हमारा काम सप्लाई को चलाए रखना है, लेकिन मौजूदा हालात में यह जिम्मेदारी अब जान जोखिम (life risk) में डालने जैसी हो गई है।”
कुल्लू-मनाली (Kullu-Manali) के रहने वाले इस कप्तान का कहना है कि वह अप्रैल के मध्य तक घर लौटने वाले थे, लेकिन अब यह संभव नहीं लग रहा। समुद्री रास्ते बंद हैं और एयरपोर्ट भी ठप (airports also shut) पड़े हैं।
भारतीय नौसेना की मौजूदगी
सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल (viral) हो रहा है। इसमें एक भारतीय मर्चेंट नेवी नाविक दावा करता है कि उसके जहाज के पास भारतीय नौसेना (Indian Navy) की एक पनडुब्बी (submarine) नजर आई। हालात को देखते हुए भारत ने इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की तैनाती बढ़ा दी है और कई वॉरशिप्स (warships) भी भेजी हैं, ताकि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।