ईरान जंग और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने सोने की वापसी की रफ्तार तेज की, RBI रिपोर्ट के अनुसार अब 77% सोना (करीब 680 टन) देश में, सिर्फ 6 महीनों में 104 टन से अधिक सोना किया रिपेट्रिएट, सुरक्षा और भरोसे का बदलता समीकरण
ईरान जंग (Iran war) के बीच दुनिया भर में चुपचाप एक बड़ा बदलाव (big change) हो रहा है – देश अपने सोने (gold) को वापस अपने ही देश में ला रहे हैं। जो सोना पहले लंदन (London) और न्यूयॉर्क (New York) जैसे शहरों में सुरक्षित रखा जाता था, अब उसे पैक करके वापस घरेलू तिजोरियों (domestic vaults) में रखा जा रहा है। इस ‘गोल्ड रश’ (gold rush) के पीछे भरोसे (trust) का सवाल है।
भारत इस मामले में सबसे तेज (India is fastest in this matter)
भारत इस मामले में सबसे तेजी से कदम उठा रहा है और अपने ज्यादातर सोने को देश के भीतर ला रहा है। भारत के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक (RBI – Reserve Bank of India) ने विदेशों से सोने को देश लाने की प्रक्रिया को काफी तेज (accelerated) कर दिया है।
RBI रिपोर्ट के अनुसार सोने की स्थिति (Gold position as per RBI report)
RBI की रिपोर्ट (अक्टूबर 2025 – मार्च 2026) के मुताबिक:
| विवरण (Detail) | मात्रा (Quantity) |
|---|---|
| भारत का कुल सोना (Total gold) | 880.52 टन (tonnes) |
| भारत में रखा सोना (Gold in India) | लगभग 77% (77 percent) – करीब 680 टन (680 tonnes) |
| विदेश में रखा सोना (Gold abroad) | लगभग 197.67 टन (197.67 tonnes) (बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास) |
| डिपोजिट के रूप में रखा सोना (Gold kept as deposit) | करीब 2.8 टन (2.8 tonnes) |
तेजी से अपना सोना वापस ला रहा भारत (India bringing back its gold rapidly)
इकोनॉमिक टाइम्स (Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, सोने को वापस देश लाने की रफ्तार (speed) काफी तेज है:
- सिर्फ 6 महीनों (just 6 months) में ही RBI ने 104.23 टन (104.23 tonnes) सोना वापस मंगा लिया।
- मार्च 2023 (March 2023) में सिर्फ 37% (37 percent) सोना ही भारत में था, जो अब काफी बढ़ चुका है।
सोना वापस लाने के पीछे क्या कारण हैं (What are the reasons behind bringing gold back)?
- वैश्विक हालात (Global conditions):
- रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine war) और पश्चिमी देशों का अफगानिस्तान की संपत्तियां फ्रीज (freezing of Afghanistan’s assets) करना।
- इन घटनाओं ने केंद्रीय बैंकों (central banks) को सोचने पर मजबूर किया कि विदेश में रखा पैसा या सोना कभी भी राजनीतिक फैसलों (political decisions) के कारण फंस सकता है (can be trapped) ।
- अपने पास रखा सोना तुरंत इस्तेमाल में मदद करता है (Gold kept with you helps in immediate use): खासकर संकट के समय (during crisis) ।
- ‘अगर सोना आपके पास नहीं, तो वह आपका नहीं’ (If gold is not with you, it’s not yours):
- पाइनट्री मैक्रो (Pinetree Macro) के ऋतेश जैन (Ritesh Jain) ने कहा, “जब वैश्विक मौद्रिक व्यवस्था (global monetary system) बदल रही है, अगर सोना आपके पास नहीं है तो वह आपका नहीं है।”
- अब सोना सिर्फ एक निवेश (investment) नहीं, बल्कि एक ‘सुरक्षा बीमा’ (safety insurance) बन गया है। बीमा तभी काम आता है जब जरूरत के समय वह आपके पास हो।
सोने की हिस्सेदारी बढ़ी, कुल भंडार घटा (Gold share increased, total reserves decreased)
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार (total foreign exchange reserves) में सोने की हिस्सेदारी (gold share) अब बढ़कर करीब 16.7% (16.7 percent) हो गई है, जो कुछ महीने पहले 13.9% थी। जबकि कुल भंडार (total reserves) घटकर 691.1 अरब डॉलर (USD 691.1 billion) रह गया है। इसका मतलब साफ है, भारत सोने पर ज्यादा भरोसा (more trust in gold) कर रहा है और उसे अपने नियंत्रण (under its own control) में रखना चाहता है।
पहले विदेश में क्यों रखा जाता था सोना (Why was gold kept abroad earlier)?
भारत पहले अपना सोना लंदन जैसे बाजारों में इसलिए रखता था क्योंकि:
- वहां ट्रेडिंग (trading) आसान होती है।
- जल्दी सौदे (quick deals) होते हैं।
- संस्थाओं पर भरोसा (trust) था।
अब सुरक्षा की परिभाषा बदल रही है (The definition of security is changing)
- पहले (Earlier): सुरक्षा का मतलब था विदेश में भरोसेमंद जगह (trustworthy place) पर सोना रखना।
- अब (Now): सुरक्षा का मतलब बनता जा रहा है, अपने कंट्रोल (in own control) में सोना रखना।