भारत की दूसरी सबसे वैल्यूएबल लिस्टेड फर्म HDFC बैंक लिमिटेड के शेयरों में बुधवार के कारोबार में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। शेयर में इस गिरावट से बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन को भारी नुकसान हुआ है। एक झटके में बैंक की वैल्यू में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आ गई।
यह गिरावट इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें बैंक में कथित वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने करोड़ों रुपये को मार्केटिंग खर्च के रूप में छिपाकर एक सरकारी कंपनी को अधिक ब्याज का भुगतान किया।
क्या है आरोप?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंक ने एक महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं किया। यह जानकारी एमडी रंगनाथ की अध्यक्षता वाली बोर्ड की समिति से जुड़ी है, जिसने 12 मार्च को वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2025 के दौरान राज्य सरकार की एजेंसी महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को किए गए कुल 45 करोड़ रुपये के भुगतान की जांच का आदेश दिया था।
आरोप है कि बैंक ने इस भुगतान को मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया, जबकि यह एक सरकारी कंपनी को दिया गया अधिक ब्याज था। इस तरह की गड़बड़ी से बैंक के वित्तीय लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
बैंक ने क्या कहा?
HDFC बैंक ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से पूरी तरह इनकार किया है। बैंक ने इस रिपोर्ट को बेबुनियाद और झूठा बताया है। बैंक के प्रवक्ता ने साफ किया है कि कंपनी ने सभी नियमों और कानूनों का पालन करते हुए हर लेन-देन किया है।
हालांकि, बैंक के इस इनकार के बावजूद निवेशकों में घबराहट बनी हुई है। रिपोर्ट आने के तुरंत बाद शेयर में भारी गिरावट देखी गई, जो बताता है कि निवेशक इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं।
पहले ही दे चुके हैं इस्तीफा निदेशक
इस पूरे मामले से जुड़ी एक और अहम जानकारी यह है कि HDFC बैंक में शॉर्ट टर्म के चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के साथ छेड़छाड़ का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि, उस समय बैंक ने कहा था कि चक्रवर्ती के साथ हुई बातचीत में बैंक की जांच में कोई खास मामला, ऑपरेशन संबंधी मुद्दा या शासन संबंधी कमियां नहीं आई थीं। लेकिन अब इस रिपोर्ट के आने के बाद उनके इस्तीफे के कारणों पर भी नए सिरे से सवाल उठ रहे हैं।
शेयर कितना टूटा?
बैंक के शेयर में बुधवार को जबरदस्त गिरावट देखी गई। कारोबार के दौरान शेयर करीब 3 फीसदी तक लुढ़ककर 726 रुपये प्रति शेयर के निचले स्तर पर पहुंच गया था। बाद में थोड़ी रिकवरी हुई और शेयर 2.48 फीसदी की गिरावट के साथ 759.55 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर पड़ा। मंगलवार को जहां बैंक का बाजार पूंजीकरण 11,99,374.28 करोड़ रुपये था, वह घटकर 11,68,000 करोड़ रुपये रह गया। यानी एक ही दिन में बैंक की वैल्यू में करीब 30,000 करोड़ रुपये की कमी आ गई।
कितनी खराब रही है शेयर की हालत?
HDFC बैंक के शेयर की हालत पिछले कुछ समय से ठीक नहीं रही है। अब इस ताजा गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। पिछले एक महीने के दौरान ही यह शेयर 3 फीसदी टूट चुका है।
छह महीने की अवधि में देखें तो यह शेयर करीब 25 फीसदी गिर चुका है, जो एक बड़ी गिरावट है। इस साल यानी 2026 में अब तक इस शेयर में 23 फीसदी की कमी आई है। पिछले एक साल के दौरान भी यह शेयर 21 फीसदी टूटा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पांच साल के लंबे समय में इस शेयर ने लगभग फ्लैट रिटर्न दिया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद शेयर में अस्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल बैंक ने आरोपों से इनकार किया है, लेकिन जांच एजेंसियों या रेगुलेटर के किसी भी कदम से बाजार और प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को इस मामले में फैसला लेने से पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि इस मामले में रेगुलेटर सेबी (SEBI) या अन्य जांच एजेंसियां कोई कार्रवाई करती हैं या नहीं। साथ ही, बैंक की ओर से इस मामले को लेकर कोई और सफाई या सबूत पेश किए जाते हैं या नहीं।
फिलहाल तो बैंक ने आरोपों को बेबुनियाद बताकर अपनी सफाई दे दी है। लेकिन निवेशकों का भरोसा वापस जीतने के लिए बैंक को और अधिक पारदर्शिता दिखानी होगी। तब तक शेयर में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।