इस्लामाबाद | पाकिस्तान में बढ़ती हिंसा और अलगाव की आवाज़ों के बीच, बड़े धार्मिक और राजनीतिक नेता मौलाना फजलुर रहमान (Fazlur Rahman) ने सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (Asim Munir) पर निशाना साधा है। उन्होंने 1971 में भारत के सामने पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण (Surrender) की याद दिलाते हुए, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात पर सवाल उठाए और चेतावनी दी कि लंबे समय तक खून-खराबा जारी रहा तो देश की भौगोलिक स्थिति में बदलाव आ सकता है।
क्या कहा मौलाना ने?
मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि वह मानते हैं कि सेना के पास ताकत है, लेकिन इतिहास को नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने दिसंबर 1971 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के सामने हथियार डालने से एक दिन पहले, जनरल याहया खान ने कहा था कि सेना गली-गली और पहाड़ों तक लड़ेगी, लेकिन अगले ही दिन सेना ने हथियार डाल दिए। उन्होंने कहा, “ये बड़े-बड़े बोल तो हमने उस वक्त भी सुने हैं।”
किन इलाकों पर जताई चिंता?
मौलाना ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि इन इलाकों में जंग जैसे हालात हैं और लगातार खून बह रहा है। उन्होंने PoK के रावलाकोट में लंबे समय से चल रहे प्रदर्शनों का भी जिक्र किया और कहा कि वहां लोग तीन महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनसे बातचीत नहीं की जा रही। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे में अलगाव की मांग करने वाले तत्वों को मजबूत होने का मौका मिल सकता है।
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‘क्या मकसद है, मुल्क को तोड़ना है?’
फजलुर रहमान ने सवाल उठाया कि आखिर इन हालात का मकसद क्या है और कहा कि जब किसी इलाके में लंबे समय तक खून बहता है, तो यह आगे होने वाले भौगोलिक बदलावों का संकेत भी बन सकता है। उन्होंने 1979 से अफगानिस्तान में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 45-46 साल से इस पूरे क्षेत्र में खून बह रहा है। उनका कहना था कि पाकिस्तान को अपने इरादों के बारे में जनता को स्पष्ट करना चाहिए।