युद्ध के चलते सुस्त पड़ा था बाजार, फरवरी में 40% गिरी थी प्रॉपर्टी की बिक्री, अब निवेशकों का भरोसा लौटा, अरबों रुपये के ट्रांजैक्शन पूरे होने की उम्मीद
ईरान-इजरायल संघर्ष (Iran-Israel conflict) के चलते पिछले कुछ समय से सुस्ती झेल रहा दुबई का रियल एस्टेट बाजार (Dubai real estate market) अब एक बार फिर बड़ी तेजी के लिए तैयार नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में हुए युद्धविराम (ceasefire) के ऐलान ने क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव (geo-political tension) को कम कर दिया है, जिससे निवेशकों (investors) के बीच फिर से सकारात्मक माहौल बनने लगा है।
अटके थे अरबों रुपये के सौदे
इस शांति समझौते (peace agreement) के बाद उन तमाम बड़े सौदों और लेन-देन के फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिन्हें युद्ध की अनिश्चितता (uncertainty) और सुरक्षा चिंताओं (security concerns) के कारण अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। बाजार विशेषज्ञों (market experts) का मानना है कि तनाव कम होते ही निवेशक ‘रुको और देखो’ की नीति (wait-and-watch policy) को छोड़कर अब सक्रिय रूप से बाजार में लौट रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जो अरबों रुपये (billions of rupees) के ट्रांजैक्शन (transactions) अनिश्चितता के चलते रोक दिए गए थे, वे अब तेजी से पूरे होंगे।
युद्ध में 40% गिर गई थी प्रॉपर्टी की बिक्री
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के बीच दुबई के रियल एस्टेट से निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगा था। DLD के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के अंत में प्रॉपर्टी की बिक्री (property sales) में 40 फीसदी (40 percent) तक की गिरावट देखी गई थी।
28 फरवरी से 22 मार्च (Feb 28 to Mar 22) के बीच केवल 8059 प्रॉपर्टी (8,059 properties) का रजिस्ट्रेशन (registration) हुआ था।
2025 था ऐतिहासिक साल
दुबई के लिए 2025 (2025) का साल ऐतिहासिक (historic) रहा था:
- करीब 187 मिलियन डॉलर (187 million dollars) की प्रॉपर्टी की बिक्री हुई थी।
- हजारों करोड़पतियों (thousands of millionaires) ने दुबई में शिफ्ट (shift) किया था।
लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान के तनाव (US-Israel-Iran tension) ने यहां के रियल एस्टेट सेक्टर (real estate sector) को हिलाकर रख दिया था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना (Corona) के बाद ऐसा पहली बार था जब दुबई के रियल एस्टेट मार्केट में इतनी सुस्ती (slowdown) देखी गई थी।
सौदे रद्द नहीं, सिर्फ टाले गए थे
ब्रोकर्स (brokers) और सलाहकारों (advisors) का कहना है कि अधिकांश लेनदेन (transactions) केवल टाल दिए गए थे (postponed) , रद्द नहीं हुए (not cancelled) । अब सीजफायर (ceasefire) के बाद इनके पूरे होने की उम्मीद है।