अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन को लेकर चल रही एसआईटी जांच के बीच नोट गिनने और चढ़ावे के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया से जुड़े करीब 43 कर्मचारी जांच के दायरे में आ गए हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर कोई अनियमितता तो नहीं हुई। दानपेटियों से निकले नोटों की गिनती और उन्हें गड्डियों में तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया है।
टीनू यादव ने खारिज किए आरोप
चंपत राय के सहयोगी माने जाने वाले राम शंकर यादव उर्फ टीनू यादव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी आरोप मनगढ़ंत हैं और कुछ लोग ईर्ष्या तथा दुर्भावना के कारण ऐसी बातें फैला रहे हैं।
टीनू यादव ने कहा कि वह वर्ष 1983 से संगठन के लिए काम कर रहे हैं और उनकी संपत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं।
संपत्ति पुरानी होने का दावा
टीनू यादव ने कहा, “अगर किसी को मेरी संपत्ति पर संदेह है तो उसकी जांच करा ली जाए। मेरा मकान और अन्य संपत्तियां मंदिर निर्माण से पहले की हैं। मैं पहले से जमीन खरीद चुका था और हॉस्टल भी संचालित करता था।”
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी संपत्ति पुरानी है और किसी तरह की चोरी नहीं हुई है। वह जांच का स्वागत करते हैं और एसआईटी ने अभी तक उनसे पूछताछ नहीं की है।
चंपत राय पर लगे आरोपों को बताया बेबुनियाद
टीनू यादव ने कहा कि राम मंदिर में किसी प्रकार की चोरी नहीं हुई है और चंपत राय पर लगाए जा रहे आरोप भी बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि बिना सबूत के आरोप लगाए जा रहे हैं और पूरे मामले को लेकर केवल प्रचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी के पास सबूत है तो सामने लाए।” यह उनकी सफाई का अंदाज है।
एसआईटी से नहीं हुई पूछताछ
टीनू यादव ने बताया कि एसआईटी ने अब तक उनसे कोई पूछताछ नहीं की है। हालांकि, यदि जांच एजेंसी उन्हें बुलाती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे।
उनके मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट में उनकी भूमिका केवल सेवा कार्यों तक सीमित रही है। वह साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते थे तथा आज भी नियमित रूप से मंदिर जाते हैं।
किस स्तर पर हो रही है गड़बड़ी?
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, दानपेटियों से निकले नोटों की गिनती और उन्हें गड्डियों में तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को जांच के दायरे में लिया गया है।
बताया जा रहा है कि अब तक करीब 43 कर्मियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। यानी चढ़ावे की पूरी चेन पर एसआईटी की नजर है।
जांच के केंद्र में ये सवाल
एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं नोट गिनने और उन्हें संग्रहित करने की प्रक्रिया में कोई ढिलाई या धांधली तो नहीं हुई।
चढ़ावे के पैसे का क्या होता है? क्या उसका सही हिसाब रखा जाता है? क्या किसी स्तर पर पैसा गायब हो गया है? ये वो सवाल हैं जिनका जवाब एसआईटी खोज रही है।
आरोपियों का बड़ा बयान
टीनू यादव ने यह भी कहा कि वह चंपत राय के सहयोगी हैं, लेकिन उनकी संपत्ति मंदिर निर्माण से पहले की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है तो वह सजा भुगतने को तैयार हैं।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बिना सबूत के केवल अफवाहों के आधार पर किसी को बदनाम करना सही नहीं है।
मंदिर ट्रस्ट पर भी सवाल
इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर चढ़ावे के पैसे की गिनती और उसके प्रबंधन की क्या प्रक्रिया है?
क्या ट्रस्ट ने इस मामले में कोई पारदर्शी व्यवस्था बनाई है? ट्रस्ट के अधिकारियों को भी जांच एजेंसी के सवालों का जवाब देना होगा।
फिलहाल जारी है जांच
फिलहाल एसआईटी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब देखना यह है कि आगे क्या खुलासे होते हैं। क्या इस मामले में कोई बड़ा नाम सामने आता है या यह सिर्फ एक अफवाह है।
उम्मीद है कि जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी। तब तक राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर यह विवाद जारी रहेगा।