नई दिल्ली | दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन (Satya Niketan) इलाके में बहुमंजिला इमारत (Building) के ढहने से 7 लोगों की मौत के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तो तेज कर दी है, लेकिन बड़े सवाल अब भी बरकरार हैं। दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने फरार चल रहे बिल्डिंग मालिक (Building Owner) हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार (Arrest) कर न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है। वहीं, MCD ने दक्षिण जोन (South Zone) के पांच अधिकारियों (Officers) को निलंबित (Suspended) कर दिया है। हालांकि, इन कार्रवाइयों के बाद भी यह सवाल बना हुआ है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारी और निलंबन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा?
क्या है पूरा मामला?
- हादसा: सत्य निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों (5 छात्र और 2 मजदूर) की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। घायलों का AIIMS में इलाज चल रहा है।
- गिरफ्तारी: पुलिस ने बिल्डिंग मालिक हरिराम, उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया है। अदालत ने मालिक और उसकी पत्नी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत और बेटे को 2 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है।
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
- MCD की कार्रवाई: MCD ने दक्षिण जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर (DC) राकेश कुमार, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर (AE) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (JE) आशीष कुमार राय शामिल हैं।
- गौर करने वाली बात: इनमें से तीन अधिकारी (DC, SE और JE) मालवीय नगर (Malviya Nagar) के रेस्टोरेंट अग्निकांड (Restaurant Fire) के समय भी MCD के दक्षिण जोन में ही तैनात थे, लेकिन उस हादसे के बाद उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
क्या उठ रहे हैं बड़े सवाल?
- क्या निलंबन काफी है?: सवाल है कि क्या सिर्फ निलंबन से व्यवस्था सुधर जाएगी? क्या निलंबित अधिकारियों पर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के बाद ठोस कार्रवाई होगी या मामला ठंडा होने पर सब पहले जैसा हो जाएगा?
- CM के निर्देश: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने सभी पेइंग गेस्ट हॉस्टलों (Paying Guest Hostels) के स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) और छात्रों वाले इलाकों (मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, साकेत, सत्य निकेतन) में चेकिंग अभियान चलाने के आदेश दिए हैं।
- असली सवाल: आखिर प्रशासन की लापरवाही (Administrative Negligence) के चलते इस तरह के हादसे कब तक होते रहेंगे? क्या इन कार्रवाइयों से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी? ये सवाल अब भी अपनी जगह बने हुए हैं।