सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 21 दिनों के अनशन के बाद इसे समाप्त करने की घोषणा की है। उन्होंने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं, जिनके पूरा होने पर वह अपना आंदोलन वापस लेंगे।
यह फैसला दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के दो दिन बाद आया है।
तीन मांगें क्या हैं?
सोनम वांगचुक ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है। ये मांगें शिक्षा सुधार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ी हैं।
पहली मांग – शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाए।
दूसरी मांग – जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाए, ताकि आम नागरिक अपनी बात रख सकें।
तीसरी मांग – शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्रों और शिक्षाविदों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए।
अस्पताल में भर्ती के बाद आया फैसला
गौरतलब है कि 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्हें 20 दिनों के अनशन के बाद हाई कोर्ट के आदेश पर अस्पताल ले जाया गया था।
अस्पताल में उनकी हालत स्थिर बताई गई थी। अब उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया है।
सरकार से बातचीत की उम्मीद
सोनम वांगचुक ने कहा कि वह सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेगी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएगी।
उनके इस फैसले का उनके समर्थकों और अन्य विपक्षी दलों ने स्वागत किया है।