मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते गहराता संकट, तेल-गैस के बाद अब दवाओं की कमी ने बढ़ाई मरीजों की मुश्किलें, कीमतें दोगुनी, आयातित कच्चे माल की कीमतें चरम पर, सरकारी अस्पतालों में ठप हुआ इलाज, 2023 से लगातार बढ़ रहे हैं दवाओं के दाम
कंगाल पाकिस्तान (Bankrupt Pakistan) का हाल बेहाल है। कर्ज का जाल (debt trap) पहले से पाकिस्तान अर्थव्यवस्था (Pakistan economy) को ध्वस्त कर रहा है, ऊपर से मिडिल ईस्ट युद्ध (Middle East war) ने देश में हाहाकार मचा दिया है।
दवाओं के संकट का कारण (Reason for the medicine crisis)
| कारण (Reason) | विवरण (Description) |
|---|---|
| मिडिल ईस्ट युद्ध (Middle East war) | अमेरिका-ईरान युद्ध (US-Iran war) और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद होने से तेल-गैस संकट (oil-gas crisis) गहराया |
| ग्लोबल सप्लाई चेन (Global supply chain) | युद्ध के चलते शिपिंग कॉस्ट (shipping cost) में इजाफा, दवा क्षेत्र के लिए जरूरी आयातित कच्चे माल (imported raw materials) की कीमतें चरम पर |
| सरकारी नीति (Government policy) | दवा प्रोडक्शन के लिए जरूरी सामानों या कच्चे माल पर 18% सामान्य सेल्स टैक्स (18% general sales tax) |
दवाओं के दामों में लगातार बढ़ोतरी (Continuous increase in medicine prices)
पाकिस्तान में जरूरी दवाओं (essential medicines) के दाम लगातार बढ़ रहे हैं:
| साल (Year) | कीमतों में बढ़ोतरी (Price increase) |
|---|---|
| 2024 (2024) | करीब 50% (around 50%) |
| 2025 (2025) | 30-40% (30-40%) |
| 2026 (2026) | मिडिल ईस्ट संकट (Middle East crisis) के चलते हाई (high) पर पहुंच गए हैं |
- बीपी-कोलेस्ट्रॉल की दवाएं (BP-Cholesterol medicines) : दो साल पहले की तुलना में दोगुनी (double) हो चुकी हैं।
- कराची के थोक विक्रेताओं (wholesalers in Karachi) के अनुसार: हर 15 से 20 दिनों (every 15-20 days) में दवा की कीमतें बदल रही हैं (changing) ।
अस्पतालों की स्थिति (Condition of hospitals)
लाहौर (Lahore) , कराची (Karachi) और पेशावर (Peshawar) जैसे शहरों के कई सरकारी अस्पताल (government hospitals) दवाओं की भारी कमी (severe shortage) का सामना कर रहे हैं और मरीजों को पर्याप्त इलाज (adequate treatment) तक मुहैया नहीं हो पा रहा है।
विशेषज्ञों की राय (Experts’ opinion)
- पाकिस्तान केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन (Pakistan Chemist and Drug Association) के अध्यक्ष अब्दुल समद बुधानी (Abdul Samad Budhani) ने कहा कि जब सरकार जरूरी दवाओं की कीमतों पर निर्णय लेने में देरी (delay) करती है, तो आयातक (importers) आपूर्ति (supply) कम कर देते हैं, जिससे कमी (shortage) हो जाती है।
- मेडिसिन प्राइस एक्सपर्ट (Medicine price expert) नूर मेहर (Noor Mehr) ने कहा कि दवाओं की कीमतों के रेग्युलेटरी ढील (regulatory relaxation) देने से निगरानी (monitoring) कमजोर हुई है, क्योंकि कंपनियां खुद ही इनकी कीमतें तय कर रही हैं।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर (Impact on Pakistan’s economy)
| प्रभाव (Impact) | विवरण (Description) |
|---|---|
| आयात बिल (Import bill) | ग्लोबल बेंचमार्क कीमतों में तगड़े उछाल के बाद 167% बढ़कर (increased by 167%) 300 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह (USD 300 million per week) से 800 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह (USD 800 million per week) हो गया है |
| प्रधानमंत्री की पुष्टि (PM’s confirmation) | प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने अप्रैल 2026 (April 2026) में इस बढ़ोतरी की पुष्टि (confirmed) की थी |
| मुद्रास्फीति (Inflation) | विश्लेषकों (analysts) के अनुसार, यदि कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में 10% (10%) का इजाफा होता है, तो पाकिस्तान में उपभोक्ता महंगाई (consumer inflation) 0.4-0.6% (0.4-0.6%) तक बढ़ सकती है – जो दक्षिण एशिया (South Asia) में सबसे अधिक संवेदनशील दरों (most sensitive rates) में से एक है |
पहले से जारी संकट और बढ़ा (Existing crisis worsened)
तेल-गैस संकट के चलते देश में पेट्रोल-डीजल (petrol-diesel) महंगा होने से आटा (flour) , दाल (pulses) , चावल (rice) समेत अन्य खाने-पीने की चीजों पर महंगाई (inflation) पहले से बढ़ चुकी है, ऊपर से अब दवाओं की कमी (medicine shortage) और बढ़ते दाम (rising prices) ने लोगों की परेशानी (difficulties) को और भी बढ़ा दिया है।
नोट: पाकिस्तान के बदहाल होने का सबसे बड़ा कारण आयातित ऊर्जा (imported energy) पर अत्यधिक निर्भरता (excessive dependence) है – जिसका लगभग 85-90% (85-90%) खाड़ी देशों (Gulf countries) से ही पूरा होता है।