प्रयागराज के प्राइवेट बैंक में 18 अकाउंट्स में फर्जीवाड़ा, ब्याज सहित 64 लाख से ज्यादा का नुकसान, गोल्ड अप्रेजर की भूमिका भी संदिग्ध, जुलाई 2025 में हुई थी शिकायत
प्रयागराज (Prayagraj) के सिविल लाइंस (Civil Lines) स्थित एक प्राइवेट बैंक (private bank) शाखा में गोल्ड लोन (gold loan) के नाम पर एक बड़ा घोटाला (scam) सामने आया है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां ठगों (fraudsters) ने बेहद शातिर तरीके से नकली सोना (fake gold) गिरवीं रखकर असली गोल्ड लोन हासिल कर लिया और लाखों रुपये का चूना बैंक को लगा दिया।
कितने लोगों पर हुआ केस?
बैंक के सहायक महाप्रबंधक (Assistant General Manager) पंकज वर्मा (Pankaj Verma) की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने (Civil Lines police station) में 16 नामजद (16 named) और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज (case registered) किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच (investigation) शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
कितने अकाउंट्स में हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि कुल 18 गोल्ड लोन अकाउंट्स (18 gold loan accounts) में फर्जीवाड़ा (fraud) किया गया।
- इन खातों के जरिए आरोपियों ने बैंक से करीब 57 लाख 19 हजार 800 रुपये (Rs 57,19,800) का लोन (loan) लिया।
- ब्याज (interest) सहित यह रकम बढ़कर करीब 64 लाख रुपये (Rs 64 lakh) से अधिक हो गई है।
कैसे हुआ फ्रॉड? (How did the fraud happen?)
इस फ्रॉड का तरीका बेहद सुनियोजित (well-planned) था:
- आरोपियों ने बैंक में नकली सोना (fake gold) गिरवीं रखा।
- गोल्ड अप्रेजर (gold appraiser) की रिपोर्ट के आधार पर लोन पास करवा लिया।
- बैंक आमतौर पर अप्रेजर (सोने की जांच करने वाले) की रिपोर्ट पर ही गोल्ड लोन मंजूर करता है, जिसका फायदा उठाकर इस पूरे सिंडिकेट (syndicate) ने धोखाधड़ी (cheating) को अंजाम दिया।
कैसे हुआ खुलासा? (How was it revealed?)
मामले का खुलासा तब हुआ, जब बैंक की नियमित प्रक्रिया के तहत गिरवीं रखे गए सोने की दोबारा जांच (re-examination) कराई गई:
- दूसरे गोल्ड अप्रेजर से जांच कराई गई।
- जांच में पता चला कि जो सोना गिरवीं रखा गया था, वह असली नहीं (not genuine) , नकली (fake) है।
इसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया और अधिकारियों ने तुरंत पूरे मामले की गहराई से जांच कराई। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े में सिर्फ ग्राहक ही नहीं, बल्कि गोल्ड अप्रेजर (gold appraiser) की भूमिका भी संदिग्ध (suspicious) है।
शिकायत के बाद FIR कब दर्ज हुई?
बैंक की ओर से जुलाई 2025 (July 2025) में ही इस मामले की शिकायत (complaint) दी गई थी, लेकिन जांच के बाद 10 अप्रैल 2026 (April 10, 2026) को सिविल लाइंस थाने में FIR दर्ज (FIR registered) की गई।
पुलिस जांच में और क्या सामने आया?
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि एक पूरा सिंडिकेट (a whole syndicate) काम कर रहा था, जो इसी तरह दूसरे जिलों के बैंकों (banks in other districts) में भी धोखाधड़ी कर चुका है। फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और मामले की जांच जारी है।