वाशिंगटन | भारत पर 100% टैरिफ (100% Tariff) का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ‘रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून’ (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इससे रूस और उससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार ट्रंप को मिल गया है। ट्रंप के निशाने पर जो देश सबसे टॉप पर हैं, उनमें भारत भी शामिल है, क्योंकि यह रूसी तेल (Russian Oil) के बड़े आयातकों में चीन के साथ आता है।
क्या है यह अमेरिकी कानून?
‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम का यह बिल रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले 5 देशों को टारगेट करता है, जिसमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। बीते अगस्त महीने में अमेरिकी सीनेट में इस बिल को 86-11 वोट से पास किया गया था। यह कानून न सिर्फ रूस, बल्कि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है। इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हर 180 दिन में इसमें शामिल लिस्ट का आकलन करेंगे। हालांकि, अमेरिका के इस कदम पर भारत ने दो-टूक कह दिया है कि देश के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
रूसी तेल का बड़ा खरीदार, टैरिफ से क्या संकट?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत लगातार रूसी तेल का आयात कर रहा है और रियायती दरों पर मिल रहे इस कच्चे तेल की खरीद में इजाफा भी होता गया है। फिलहाल भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 40% से ज्यादा क्रूड ऑयल रूस से खरीद रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत ने रूस से करीब 20.8 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड खरीदा, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 28.2 लाख बैरल प्रतिदिन था।
अगर अमेरिका की ओर से 100% टैरिफ के खतरे के चलते भारत रूस के रियायती तेल के बजाय अन्य देशों से तेल खरीदता है, तो इसका सीधा असर आयात बिल में तेज उछाल के रूप में दिखेगा। तेल महंगा खरीदने से देश में महंगाई (Inflation) का जोखिम भी बढ़ जाएगा, खासकर पेट्रोल-डीजल पर महंगाई की मार पड़ सकती है, जिससे आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होगा।
अमेरिका से कारोबार पर टैरिफ की मार
अभी भारत पर अमेरिकी टैरिफ 18% है, लेकिन अगर नए बिल के तहत भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखता है, तो उसे 100% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर देखने को मिलेगा। हाई टैरिफ लागू होने से भारतीय सामान अमेरिका में महंगा हो जाएगा और अमेरिकी ग्राहक बांग्लादेश, वियतनाम या अन्य देशों से आने वाले सस्ते ऑप्शन की ओर ट्रांसफर होने लगेंगे, जो भारत के निर्यात पर बड़ी चोट होगी।
भारत के निर्यात-आयात के आंकड़े
- अगस्त 2026: भारत का अमेरिका को निर्यात 21.83% की उछाल के साथ 8.4 अरब डॉलर (करीब 80 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) रहा, जबकि अमेरिका से भारत आने वाले माल के आयात में 65.78% की वृद्धि हुई और यह 5.97 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- अप्रैल-अगस्त 2026-27: भारत का अमेरिका को कुल माल निर्यात 6.17% बढ़कर 42.8 अरब डॉलर, जबकि इसी अवधि में अमेरिका से आयात 29.6% बढ़कर 28 अरब डॉलर रहा।
- सेवाओं का निर्यात: बीते साल के 31.19 अरब डॉलर की तुलना में 38.87 अरब डॉलर, जबकि आयात 15.59 अरब डॉलर से 21.42 अरब डॉलर रहा।
भारत से टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, मरीन प्रोडक्ट्स और केमिकल्स बड़ी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। टैरिफ से इनके ऑर्डर घटने का खतरा है।