दिल्ली में रहने वाले एक दक्षिण भारतीय फैन ने साझा किया भावुक अंदाज, विजय की फिल्में ही उनकी दिवाली हुआ करती थीं, थुप्पक्की, कथ्थी, मर्सल, सरकार, बिगिल… अब जब विजय सीएम बनने जा रहे हैं तो फैन के मन में है दोहरा एहसास- खुशी भी, गम भी
थलपति विजय (Thalapathy Vijay) के राजनीति (politics) में कदम रखने के साथ ही एक फैन (fan) के लिए एक पूरा एहसास बदल रहा है। दिल्ली (Delhi) में रहने वाले एक दक्षिण भारतीय (South Indian) के लिए दिवाली सेलिब्रेशन (Diwali celebration) का मतलब था – विजय की फिल्में (Vijay’s films) । जब स्क्रीन पर विजय नहीं होंगे, तो क्या दिवाली पहले जैसी बचेगी?
विजय की फिल्में = दिवाली (Vijay’s films = Diwali)
फैन ने लिखा:
- “दिवाली के साथ मेरा रिश्ता हमेशा थोड़ा अलग रहा है। मैं दक्षिण भारतीय हूं। हमारी पहचान सिनेमा (cinema) था। और खासकर दिवाली की रात रिलीज़ होने वाली थलपति विजय की फिल्म।
- मैं चुपचाप मुरुक्कू और रिबन पकोड़ा के पैकेट दबाए थिएटर (theatre) में घुस जाता था। मेरी दिवाली थिएटर के अंदर मन रही होती थी।
- और इन सारी चीजों में केंद्र में होते थे विजय (Vijay) । सिर्फ एक एक्टर या स्टार की सूरत में नहीं। एक एहसास (emotion) बनकर।”
साल दर साल विजय के साथ दिवाली (Year by year Diwali with Vijay)
| साल (Year) | फिल्म (Film) | फैन ने क्या महसूस किया (What the fan felt) |
|---|---|---|
| 2012 | थुप्पक्की (Thuppakki) | दिवाली को तेज, धारदार और झन्नाटेदार (sharp and exciting) बना दिया। |
| 2014 | कथ्थी (Kaththi) | जश्न के साथ अंतरात्मा को छूने वाली एक आवाज (a voice that touches the conscience) भी थी – किसानों के लिए। |
| 2017 | मर्सल (Mersal) | सिर्फ एंटरटेन नहीं करती थी, सिस्टम से सवाल करने (questioning the system) के लिए झिंझोड़ती थी। |
| 2018 | सरकार (Sarkar) | सिर्फ स्क्रीन तक सीमित नहीं रही, थिएटर के बाहर भी साथ चली आई (came along outside the theatre) – आपका वोट, आपकी आवाज़। |
| 2019 | बिगिल (Bigil) | पहली बार विजय को सिर्फ हमेशा जीतने वाले हीरो की तरह नहीं देख रहा था। एक ऐसे इंसान को देख रहा था जो दूसरों को आगे बढ़ाता है (uplifts others) , उनमें विश्वास भरता है। |
दिल्ली के थिएटर में दक्षिणी फिल्म का क्रेज (Craze of a South film in a Delhi theatre)
फैन ने आगे लिखा:
- “मैं दिल्ली के थिएटर्स में था, साउथ से बहुत दूर। लेकिन उन लोगों के बीच जो ठीक मेरी ही तरह फील कर रहे थे।
- सीटियां (whistles) , चिल्लाना (cheering) , तालियां (clapping) – हर रिएक्शन पिछले से तगड़ा। एक ऐसा शहर, जहां तमिल मुख्य भाषा भी नहीं है, वहां पूरा थिएटर थलपति विजय के लिए फट पड़ता था…
- यह सिर्फ फैनडम (fandom) नहीं था। यह कनेक्शन (connection) था।”
विजय ने रजनीकांत और कमल हासन से अलग क्यों किया (Why did Vijay differ from Rajinikanth and Kamal Haasan)?
फैन ने तुलना करते हुए लिखा:
- रजनीकांत (Rajinikanth) ने कभी सच में पूरी तरह शुरुआत की ही नहीं।
- कमल हासन (Kamal Haasan) ने कदम रखा तो सही, लेकिन उनका कनेक्ट कभी पूरी तरह चुनावी सफलता में नहीं बदल पाया।
- विजय (Vijay) के साथ कनेक्शन अलग लगता है क्योंकि यह रातोरात नहीं बना (didn’t happen overnight) । इसे सालोंसाल जिया गया है (lived over the years) । महसूस किया गया है (felt over the years) । फिल्म दर फिल्म।
दोहरा एहसास – मीठा भी, कड़वा भी (Mixed feelings – sweet and bitter)
फैन ने आगे लिखा:
- “अब, जब थलपति विजय पूरी तरह राजनीति में कदम रख रहे हैं, उस रास्ते पर जो सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी (CM chair) तक जाता है, तो लग रहा है जैसे कुछ खत्म होने को है (something is about to end) । बस… चुपचाप।
- क्योंकि मुझे पता है, एक दिवाली ऐसी आएगी जब मैं थिएटर में जाऊंगा… और वह स्क्रीन पर नहीं होंगे (he won’t be on screen) ।
- न कोई एंट्री शॉट (entry shot) । न सीटियां बटोरने वाला सीन (scene that gathers whistles) । न वह गरजती हुई भीड़ (that roaring crowd) ।”
आखिर में फैन ने कहा (Finally, the fan said)
- “मैं खुश हूं। मुझे गर्व भी है, कि वह अब कुछ बड़ा बनने जा रहे हैं। एक ऐसी भूमिका में उतरने जा रहे हैं जिसमें असली ताकत और जिम्मेदारी (real strength and responsibility) है।
- लेकिन साथ ही एक सवाल भी है – अब मैं शुक्रवार को क्या करूंगा? (What will I do on Friday now?)
- विजय सिर्फ एक एक्टर के रूप में नहीं। एक इमोशन (emotion) बनकर। यह था मेरा सेलिब्रेशन। यह थी मेरी विजय वाइब (my Vijay vibe) !”