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बिजनेस

भारत में बिजली संकट की बढ़ी चिंता, एक-तिहाई कोयला आधारित पावर प्लांट्स में स्टॉक बेहद कम

SMW NEWS BUREAU
Last updated: 14/09/2026 8:52 AM
By SMW NEWS BUREAU 4 Min Read
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भारत में बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। देश के करीब एक-तिहाई कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 तक 59 पावर प्लांट ऐसे थे जहां कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर था, यानी उनके पास सामान्य जरूरत का 25% से भी कम ईंधन उपलब्ध था।

Contents
59 पावर प्लांट में क्रिटिकल स्टॉकबिजली की मांग भी बनी बड़ी वजहबारिश और कोयला परिवहन में भी आई रुकावटसरकार का दावा—देश में कुल कोयला उपलब्धता पर्याप्तक्या भारत में बिजली कटौती का खतरा है?

हालांकि, केंद्र सरकार ने कोयले की सप्लाई बढ़ाने के लिए रेलवे और सड़क परिवहन के जरिए अतिरिक्त आपूर्ति शुरू कर दी है। ऐसे में फिलहाल स्थिति को तत्काल बिजली संकट के बजाय सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

59 पावर प्लांट में क्रिटिकल स्टॉक

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के अंत में 45 पावर प्लांट क्रिटिकल कोयला स्टॉक की स्थिति में थे। सितंबर की शुरुआत में यह संख्या तेजी से बढ़ी और 9 सितंबर तक 59 प्लांट तक पहुंच गई। इन संयंत्रों में उपलब्ध कोयला कई मामलों में सिर्फ कुछ दिनों की जरूरत पूरी करने लायक रह गया है।

कोयला मंत्रालय क्रिटिकल प्लांट्स की लगातार निगरानी कर रहा है और इन संयंत्रों तक प्राथमिकता के आधार पर कोयला पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बिजली की मांग भी बनी बड़ी वजह

इस संकट को बढ़ाने वाली एक प्रमुख वजह बिजली की असामान्य रूप से ऊंची मांग है। सितंबर में सामान्य तौर पर बिजली की मांग में कमी आने लगती है, लेकिन 2026 में गर्मी का असर लंबे समय तक बना हुआ है। इससे एसी और कूलिंग उपकरणों के इस्तेमाल के कारण बिजली की खपत ऊंची बनी हुई है।

8 सितंबर को देश की पीक पावर डिमांड करीब 260 GW तक पहुंच गई थी। लगातार ऊंची मांग ने थर्मल पावर प्लांट्स पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

बारिश और कोयला परिवहन में भी आई रुकावट

मानसून की बारिश ने कोयला खनन और उसके परिवहन को भी प्रभावित किया। कई कोयला उत्पादक क्षेत्रों में बारिश और जलभराव के कारण खदानों से बिजली संयंत्रों तक ईंधन पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

हालांकि, मौसम में सुधार के साथ सप्लाई बढ़ाने के प्रयास तेज किए गए हैं। 3 सितंबर को पावर सेक्टर के लिए 370 रेक प्रतिदिन की लोडिंग हो रही थी, जो 6 सितंबर तक बढ़कर 444 रेक प्रतिदिन हो गई। यह करीब 20% की वृद्धि है।

सरकार का दावा—देश में कुल कोयला उपलब्धता पर्याप्त

क्रिटिकल स्टॉक वाले पावर प्लांट्स की संख्या बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि देश में कुल कोयला उपलब्धता पर्याप्त है। कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, देश में करीब 123.7 मिलियन टन कोयले का स्टॉक उपलब्ध है, जो मौजूदा खपत के हिसाब से लगभग 51 दिनों की जरूरत के बराबर है।

इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा चुनौती देश में कोयले की कुल कमी से ज्यादा समय पर पावर प्लांट्स तक कोयला पहुंचाने की लॉजिस्टिक समस्या से जुड़ी है।

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क्या भारत में बिजली कटौती का खतरा है?

फिलहाल देशव्यापी बिजली संकट या व्यापक स्तर पर बिजली कटौती की स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार ने क्रिटिकल प्लांट्स तक अतिरिक्त कोयला पहुंचाने के लिए रेल और सड़क दोनों माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ाया है।

फिर भी, अगर बिजली की मांग लंबे समय तक ऊंची रहती है और कोयले की आपूर्ति में दोबारा बाधा आती है, तो कुछ राज्यों में बिजली उत्पादन और सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश में भी कोयले की कमी के चलते कुछ क्षेत्रों में रात के समय सीमित पावर रोस्टरिंग की खबर सामने आई है।

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TAGGED: Coal India, Coal Shortage, Coal Stock, Electricity Demand, Ministry of Coal, Power Crisis India, Power Sector, Thermal Power Plants, कोयला संकट, बिजली संकट 2026, भारत बिजली संकट
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