मनोरंजन की दुनिया में आज का दिन काफी शानदार रहा। कई खबरों ने सुर्खियां बटोरीं। सीएम थलपति विजय और सूर्या से जुड़ी एक पुरानी बहस चर्चा में आई, जो विजय के सुपरस्टार बनने से जुड़ी थी।
दिलचस्प बात यह है कि विजय और सूर्या की सक्सेस में फिल्मों की अदला-बदली का ऐसा कनेक्शन है, जो फिल्मचियों के होश उड़ा देगा। यह कहानी है ‘थुपक्की’ फिल्म की, जिसे सूर्या ने ठुकरा दिया था और विजय ने अपना लिया।
थुपक्की: सूर्या ने ठुकराया, विजय ने सेट किया रिकॉर्ड
‘करुप्पु’ एक्टर सूर्या ने एक बार ‘थुपक्की’ फिल्म को ठुकरा दिया था, जिसके बाद यह फिल्म विजय के पास गई। विजय ने इस फिल्म में काम किया और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
इसी फिल्म से विजय को जबरदस्त स्टारडम मिला और वह तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। रजनीकांत के बाद विजय ने जो स्टारडम हासिल किया, वह किसी से छिपा नहीं है। अब सूर्या अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘करुप्पु’ से उसी राह पर हैं।
राजेश कुमार: साराभाई से बिहार के गांव तक
साराभाई वर्सेज साराभाई फेम एक्टर राजेश कुमार ने एक्टिंग से दूरी बनाकर खेती-बाड़ी पर फोकस किया है। वह बिहार के गांव में किसान बनकर फल-सब्जियां उगा रहे हैं, जिसमें उन्हें अपने परिवार का साथ मिल रहा है।
राजेश कुमार ने खुद खुलासा किया था कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब वह करीब 2 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गए थे। हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके खाते में सिर्फ 2,500 रुपये बचे थे और बच्चों के लिए छोटी-छोटी चीजें खरीदना भी मुश्किल हो गया था।
लीना अशर ने शेयर की टीना अंबानी की यादें
टीना अंबानी की भांजी लीना अशर ने एक भावुक पोस्ट में उनकी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि टीना ने कभी बॉलीवुड छोड़ने का अफसोस नहीं किया और परिवार के लिए हमेशा मजबूत सहारा बनी रहीं।
टीना अंबानी ने 1980-90 के दशक में कई फिल्मों में काम किया। शादी के बाद उन्होंने इंडस्ट्री से दूरी बना ली थी। लीना अशर के पोस्ट ने उनसे जुड़ी कई बातों को एक बार फिर से लोगों के सामने रख दिया है।
बॉबी देओल के बेटे करेंगे डेब्यू
सनी देओल के दोनों बेटों के बाद अब बॉबी देओल के बेटे भी बड़े पर्दे पर गदर मचाने को तैयार हैं। बॉबी देओल ने खुद खुलासा किया है कि उनके दोनों बेटे आर्यमान और धरम हीरो बनना चाहते हैं।
हालांकि, बॉबी अपने बड़े बेटे को अमेरिका में सेटल करना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब देखना दिलचस्प होगा कि बॉबी देओल के बेटे फिल्म इंडस्ट्री में कैसा प्रदर्शन करते हैं।
राजीव वर्मा: सलमान के पिता से होटल मालिक तक
‘मैंने प्यार किया’ फिल्म से राजीव वर्मा ने एक्टिंग डेब्यू किया था। इस फिल्म में उन्होंने सलमान खान के पिता का रोल प्ले किया था। वह कई हिट फिल्मों में दिखे। मगर फिर सालों बाद वह इंडस्ट्री छोड़कर भोपाल में शिफ्ट हो गए।
राजीव वर्मा अब एक होटल चलाते हैं। उन्होंने एक्टिंग को अलविदा कहकर एक नया जीवन शुरू किया। उनकी यह कहानी बताती है कि इंडस्ट्री में कभी भी कुछ पक्का नहीं होता और समय के साथ बदलाव लाना ही जिंदगी है।
विजय के सीएम बनने के बाद नए सुपरस्टार की तलाश
विजय के मुख्यमंत्री बनने से तमिल सिनेमा के अगले सुपरस्टार की खोज तेज हो गई है। रजनीकांत के बाद विजय ने जो स्टारडम हासिल किया था, उस राह पर अब सूर्या अपनी फिल्म ‘करुप्पु’ से आगे बढ़ रहे हैं।
तमिल सिनेमा के फैंस अब इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर विजय के बाद कौन वह सितारा होगा जो उनकी जगह लेगा। फिलहाल सूर्या इस रेस में सबसे आगे हैं, लेकिन देखना यह भी है कि और कौन-कौन से कलाकार इस मुकाम को हासिल करते हैं।
राजेश कुमार का संघर्ष
राजेश कुमार के संघर्ष की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। करीब 2 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबने के बाद उनके पास सिर्फ 2,500 रुपये बचे थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने एक्टिंग छोड़ी और खेती-बाड़ी को अपना लिया। आज वह बिहार के गांव में किसान हैं और फल-सब्जियां उगा रहे हैं। उनका परिवार भी उनके साथ है। यह कहानी बताती है कि संघर्ष करने वालों की कभी हार नहीं होती।
कलाकारों के संघर्ष और सफलता की कहानियां
मनोरंजन जगत में आज एक से बढ़कर एक कहानियां सामने आईं। चाहे वह सूर्या और विजय की थुपक्की वाली कहानी हो, या राजेश कुमार के एक्टिंग छोड़कर किसान बनने की। इन सबने साबित कर दिया कि जिंदगी में कुछ भी हो सकता है।
कभी ठुकराई गई फिल्म किसी को सुपरस्टार बना सकती है, तो कभी एक सफल एक्टर अपना करियर छोड़कर गांव में रहना पसंद कर सकता है। यही मनोरंजन जगत की खूबी है।
अगले हफ्ते का इंतजार
अगले हफ्ते फिल्म इंडस्ट्री में और क्या नया होता है, इसका इंतजार तो होगा ही। अगले रविवार को फिर से इंडस्ट्री की नई उड़ानों और उतार-चढ़ाव से रूबरू कराएंगे।
तब तक के लिए, इन कहानियों को पढ़कर यह समझना जरूरी है कि फिल्म इंडस्ट्री सिर्फ ग्लैमर और चकाचौंध नहीं है, बल्कि यहां संघर्ष, त्याग और कड़ी मेहनत का भी बड़ा इतिहास है। जो लोग यहां टिकते हैं, वही मुकाम हासिल करते हैं।