मुंबई | बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध के बाद हर बार एक सवाल सामने आता है – क्या कानून को अपना काम करने देना चाहिए या फिर अपराध कबूल करने वाले दोषियों को तुरंत सजा मिलनी चाहिए? यही सवाल मेघना गुलजार (Meghna Gulzar) की फिल्म ‘दायरा’ (Daayra) आपके सामने रखती है। यह एक गंभीर क्राइम थ्रिलर (Crime Thriller) है, जो 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। फिल्म आपको किसी एक जवाब की तरफ धकेलती नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को सामने रखकर सोचने पर मजबूर करती है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी DCP रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) और DCP अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) के इर्द-गिर्द घूमती है। रमन और उसकी टीम पर एक युवती के रेप और मर्डर के आरोपियों को एनकाउंटर (Encounter) में मारने का मामला है। इस केस की जांच अजूनी को सौंपी जाती है, और यहीं से फिल्म का असली खेल शुरू होता है। अजूनी साफ कहती है, “मैं अपने साथियों की जांच नहीं करती, मैं घटनाओं की जांच करती हूं।” उसके लिए वर्दी से पहले कानून है। दूसरी तरफ, रमन का मानना है कि जब सिस्टम बार-बार देरी करता है, तब अपराधियों को सजा मिलना भी जरूरी है। यही दोनों के बीच का टकराव फिल्म को बांधे रखता है।
कलाकारों का प्रदर्शन कैसा है?
- करीना कपूर खान (DCP अजूनी): करीना बतौर DCP अजूनी काफी असरदार लगी हैं। उनके किरदार में वो आम बॉलीवुड वाली गुस्सैल पुलिस अफसर की छवि नहीं है। अजूनी अपनी बात डायलॉग, तर्क और सूखे हास्य से रखती है। उनका शांत लेकिन सख्त अंदाज किरदार को अलग बनाता है।
- पृथ्वीराज सुकुमारन (DCP रमन): पृथ्वीराज का रमन भी उतना ही मजबूत है। उनका किरदार जरूरत से ज्यादा चीखता-चिल्लाता नहीं, बल्कि अपनी चुप्पी और आंखों के एक्सप्रेशन से दबाव बनाता है।
- सपोर्टिंग कास्ट: कंवलजीत सिंह, अचिंत कौर, अनुजा साठे, सीमा आजमी, बिस्वपति सरकार और जितेंद्र जोशी अपने-अपने हिस्से में ठीक बैठते हैं। पीड़िता की मां के छोटे से किरदार में क्षिति जोग काफी असर छोड़ती हैं।
कैसा है निर्देशन और स्क्रीनप्ले?
मेघना गुलजार को ऐसे विषयों की समझ पहले भी ‘तलवार’ और ‘राजी’ में दिखाई दी है। ‘दायरा’ में भी उनका डायरेक्शन कहानी पर हावी होने के बजाय उसे आगे बढ़ाता है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर ज्यादातर जगहों पर जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल हुआ है। बेवजह का शोर या ओवर-द-टॉप साउंड डिजाइन नहीं है, जिससे सिचुएशन और कलाकारों की परफॉर्मेंस को सांस लेने की जगह मिलती है।
कहाँ चूकी फिल्म?
फिल्म का पहला हाफ सबसे मजबूत हिस्सा है। अजूनी की जांच, रमन का नजरिया और दोनों के बीच बढ़ता टकराव आपको कहानी में बनाए रखता है। लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म कुछ हद तक एक्शन और घटनाओं के नतीजों पर ज्यादा चली जाती है। जिस सिस्टम और कानूनी प्रक्रिया की गहराई पहले हाफ में महसूस होती है, दूसरे हाफ में उस पर उतना फोकस नहीं रहता। यहीं फिल्म थोड़ी अपनी शुरुआती धार खोती है।
कुल मिलाकर कैसी है फिल्म?
‘दायरा’ एक अच्छी और गंभीर क्राइम थ्रिलर है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत इसका सवाल है – कानून अपना काम करे या इंसाफ तुरंत हो? फिल्म उस सवाल का फैसला आपके लिए नहीं करती, यही इसकी खूबसूरती भी है और कुछ जगह इसकी सीमा भी। 143 मिनट की ये फिल्म आपको बांधे रखती है और थिएटर से निकलने के बाद भी इसके सवाल दिमाग में घूमते रहते हैं। अगर आपको सीरियस क्राइम थ्रिलर, पुलिस ड्रामा और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियां पसंद हैं, तो ‘दायरा’ आपके लिए एक ऐसी फिल्म है जिसे बड़े पर्दे पर देखा जा सकता है।