तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बने सुपरस्टार थलपति विजय ने अब एक ऐसा फैसला लिया है, जो तमिल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बड़ा बूस्ट साबित होगा। विजय ने नई तमिल फिल्मों के लिए तमिलनाडु के थिएटर्स को दिन में 5 शोज चलाने की इजाजत दे दी है। पहले तमिलनाडु में थिएटर्स के लिए दिन में केवल 4 शोज ही चलाने का नियम था। यह नियम करीब 70 साल पुराना था, जिसे अब बदल दिया गया है।
इस फैसले से तमिल फिल्म इंडस्ट्री को एक बड़ा फायदा होगा। आइए जानते हैं कि पहले 4 शोज का नियम क्यों था, और इसके बदलने से कैसे इंडस्ट्री को फायदा होगा।
तमिलनाडु में क्यों थी केवल दिन में 4 शोज की इजाजत?
तमिलनाडु में सुपरस्टार्स का क्रेज 1950 के दशक से ही बहुत तगड़ा रहा है। पहले एमजीआर, फिर रजनीकांत और बाकी सुपरस्टार्स के फैंस में फर्स्ट डे-फर्स्ट शो का अलग ही क्रेज था। पहले शो में सुपरस्टार के बड़े-बड़े होर्डिंग और कटआउट लगाना, उन पर हार चढ़ाया जाना, दूध से नहलाया जाना आज भी खूब होता है।
जब किसी फिल्म के पहले शो का इतना क्रेज हो तो जाहिर सी बात है कि इस शो के टिकट्स की डिमांड भी तगड़ी होती थी। तमिलनाडु में फिल्म टिकटों के दाम सरकारी नियंत्रण में रहे हैं। आज भी तमिलनाडु में सिंगल स्क्रीन्स और मल्टीप्लेक्स स्क्रीन्स में फिल्म टिकट का दाम 50 रुपये से 200 रुपये तक ही रहता है। सबसे प्रीमियम सीट और फॉर्मेट का टिकट भी 500 रुपये तक ही जाता है।
क्यों लगाई गई थी 4 शोज की सीमा?
बड़ी फिल्मों के सुबह 4, 5 या 6 बजे वाले अर्ली मॉर्निंग शोज के लिए कई थिएटर्स मनमाने दाम में टिकट बेचने लगे। टिकट बिक्री के रिकॉर्ड में भी हेराफेरी करके टैक्स चोरी की जाने लगी। ऊपर से फर्स्ट डे-फर्स्ट शोज के क्रेज में राज्य की ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ना, दुर्घटनाओं में फैंस का घायल होना और मौत तक हो जाना बार-बार होने लगा।
इसलिए तमिलनाडु सिनेमाज (रेगुलेशन) रूल्स 1957 के तहत, सरकार ने दिन में केवल 4 शोज की लिमिट लगा दी। इन शोज की टाइमिंग भी सुबह 9 बजे से रात 1.30 बजे तक फिक्स कर दी गई। हालांकि, थिएटर्स को छुट्टी या किसी त्योहार के दिन केवल एक ‘स्पेशल शो’ की इजाजत थी। लेकिन इस स्पेशल शो की परमिशन के लिए थिएटर्स को अलग से अप्लाई करना पड़ता था, जहां कभी इजाजत मिलती थी, कभी नहीं। थलपति विजय की अपनी फिल्म ‘लियो’ (2023) के लिए ही तत्कालीन सरकार ने अर्ली मॉर्निंग शो की परमिशन नहीं दी थी।
4 शोज की लिमिट क्यों थी नुकसानदेह?
बड़े बजट की फिल्मों को सफलता के लिए बॉक्स ऑफिस कलेक्शन भी ज्यादा चाहिए होता है। आपने कई बार देखा होगा कि कई बड़ी फिल्मों के शोज तो दूसरे राज्यों में चौबीसों घंटे खुले रहते हैं। तमिल फिल्मों की थिएट्रिकल रिलीज और ओटीटी रिलीज में गैप भी कम रहता है, इसलिए बॉक्स ऑफिस कमाई के आधार पर ओटीटी डील भी बदलती है।
लेकिन तमिलनाडु में सिर्फ 4 शो प्रतिदिन की यह लिमिट बड़ी तमिल फिल्मों को बड़ा नुकसान पहुंचाती थी। इससे बड़ी फिल्मों का पूरा बॉक्स ऑफिस गणित गड़बड़ा जाता था। इसलिए तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स और थिएटर्स लंबे समय से दिन में एक फिल्म के 5 शोज के लिए अपील कर रहे थे।
मुख्यमंत्री विजय के बदलाव से क्या फायदा होगा?
फिल्म सुपरस्टार रह चुके विजय ने यह आदेश जारी किया है कि अब थिएटर्स हर नई फिल्म के पहले 7 दिनों तक 5 शोज चला सकते हैं। यह 5 शोज का नियम वीकेंड्स, त्योहारों की छुट्टी और सरकारी छुट्टी के दिन भी मान्य रहेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि 4 शोज से अलग, इस पांचवें शो को चलाने के लिए थिएटर्स को अलग से चेन्नई के पुलिस कमिश्नर या किसी और विभाग की अनुमति की जरूरत नहीं है। इससे एक बड़ा प्रशासनिक स्पीड-ब्रेकर हट गया है।
किसी भी फिल्म को अपने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का सबसे बड़ा हिस्सा रिलीज के पहले हफ्ते में ही मिलता है। और 5 शोज के लिए ऑफिशियल परमिशन मिलने से फिल्मों का कलेक्शन काफी बेहतर हो जाएगा। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया के डेटा के अनुसार, तमिलनाडु में करीब 1500 स्क्रीन्स हैं। इन स्क्रीन्स पर रोजाना एक शो बढ़ने का गणित समझना बहुत आसान है।
कितना बढ़ेगा फिल्मों का कलेक्शन?
तमिलनाडु में एक फिल्म टिकट का एवरेज प्राइस 150 रुपये मान लेते हैं। 200 सीटों वाले एक थिएटर में, 50 फीसदी ऑक्यूपेंसी में भी एक शो का कलेक्शन 15 हजार रुपये हो जाता है। अगर यह फिल्म 1000 स्क्रीन्स पर भी रिलीज हुई है, तो हर दिन सिर्फ एक शो बढ़ने से फिल्म का डेली ग्रॉस कलेक्शन 1.5 करोड़ रुपये बढ़ जाएगा।
पुराने नियम के मुकाबले, नए नियम के हिसाब से पहले एक हफ्ते में इस फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 10.5 करोड़ रुपये ज्यादा होगा। अगले वीकेंड में, छुट्टी के दिन फिर से इसे एक्स्ट्रा शो मिलेगा तो कमाई बढ़ती जाएगी। ज्यादा कलेक्शन के दम पर इस फिल्म को ओटीटी डील भी पहले से महंगी मिलेगी।
सिंगल स्क्रीन्स को होगा सबसे बड़ा फायदा
विजय के आदेश में सबसे बड़ी बात है, एक्स्ट्रा शो चलाने के लिए प्रशासन की मंजूरी लेने की जरूरत खत्म होना। पुराने नियम के अनुसार, एक्स्ट्रा शो चलाने के लिए परमिशन की जरूरत पड़ती थी। ऐसे में मल्टीप्लेक्स और बड़े थिएटर चेन्स तो प्रशासन से इजाजत ले लेते थे।
लेकिन छोटे सिंगल स्क्रीन थिएटर मालिकों के लिए प्रशासन से परमिशन लेना भी आसान नहीं था। ऐसे थिएटर मालिक पहले शो के क्रेज को कलेक्शन में बदलने का बड़ा मौका चूक जाते थे। यही वे थिएटर्स भी हैं, जिन पर घाटे का खतरा सबसे ज्यादा मंडराता है। अब उनके लिए भी 5 शोज चलाने का रास्ता साफ हो गया है।
फिल्म इंडस्ट्री को कैसे मिलेगा फायदा?
फिल्मों के 5 शोज चलाने का आदेश हर किस्म के थिएटर के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। जब फिल्मों की कमाई बढ़ने के रास्ते खुलेंगे, तो फिल्ममेकर्स कहानियों पर थोड़ा और बढ़कर खर्च करेंगे, जिससे इंडस्ट्री का स्केल बढ़ेगा।
लिमिटेड बजट वाली छोटी फिल्मों के लिए भी बॉक्स ऑफिस से फायदा बढ़ेगा, तो नए फिल्ममेकर्स और नई कहानियों को थोड़ी और ज्यादा जगह मिलेगी। खुद फिल्म सुपरस्टार रहे विजय के मुख्यमंत्री बनने का एक बड़ा फायदा तो तमिल फिल्म इंडस्ट्री को मिल गया है।
आगे क्या?
यह फैसला तमिलनाडु की फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में इस फैसले का कितना सकारात्मक असर देखने को मिलता है। साथ ही, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि अपनी पुरानी इंडस्ट्री की भलाई के लिए सीएम विजय आगे और क्या-क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल, तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और थिएटर मालिक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि इससे तमिल फिल्मों की कमाई में बढ़ोतरी होगी और इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।