नई दिल्ली | आज के दौर में स्मार्टफोन के बिना एक पल भी गुज़ारना मुश्किल हो गया है। लेकिन हॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन इसका अपवाद हैं। ‘इनसेप्शन’, ‘इंटरस्टेलर’, ‘द डार्क नाइट’ ट्रिलॉजी और ऑस्कर जीतने वाली ‘ओपेनहाइमर’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाने वाले नोलन आज भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करते। इतना ही नहीं, उन्होंने कभी ई-मेल अकाउंट भी नहीं बनाया। यह जानकारी सामने आते ही फैंस और फिल्म जगत में हैरानी की लहर दौड़ गई है।
क्यों नहीं रखते नोलन स्मार्टफोन?
नोलन ने कई इंटरव्यूज़ में इस बात का खुलासा किया है कि वे जानबूझकर स्मार्टफोन से दूर रहते हैं। उनका कहना है कि उनका ध्यान बहुत जल्दी भटक जाता है, इसलिए वे नहीं चाहते कि उनके पास हर समय इंटरनेट की सुविधा हो। इसके बजाय, वे एक साधारण फ्लिप फोन (पुराने ज़माने का मोबाइल) रखते हैं, जिससे वे सिर्फ कॉल कर पाते हैं।
एक बार उन्होंने कहा था, “मेरे कुछ बेहतरीन विचार शांत और खाली पलों में आते हैं। आजकल ज़्यादातर लोग ऐसे ही पलों को फोन पर स्क्रॉल करने में बिता देते हैं। मैं ऐसे ही खाली पलों में सबसे अच्छी तरह सोच पाता हूँ।”
ई-मेल का भी नहीं करते इस्तेमाल
सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि नोलन ने कभी ई-मेल अकाउंट भी नहीं बनाया। यह सुनने में जितना अजीब लगता है, उतना ही हैरान करने वाला भी है, क्योंकि वे इतने बड़े स्तर की फिल्में बनाते हैं। हालांकि, इसका एक आसान सा जवाब है- उनकी पूरी टीम यह काम संभालती है। नोलन का कहना है कि वे अपना पूरा ध्यान फिल्म बनाने पर लगाना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने ये सारी ज़िम्मेदारी अपनी टीम को सौंपी हुई है।
नोलन की फिल्ममेकिंग से मेल खाती है यह आदत
नोलन की यह आदत उनके फिल्म बनाने के अंदाज से भी मेल खाती है। वे उन डायरेक्टर्स में से हैं, जो ज़्यादा CGI (कंप्यूटर इफेक्ट्स) के बजाय प्रैक्टिकल इफेक्ट्स (वास्तविक प्रभाव) पर ज़ोर देते हैं। वे बड़े फॉर्मेट वाले कैमरों से शूटिंग करना पसंद करते हैं और हमेशा दर्शकों को अपनी फिल्में सबसे बड़ी स्क्रीन पर देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनका सादा फोन इस्तेमाल करने का फैसला भी इसी सोच से आता है कि कम रुकावटों से ज़्यादा रचनात्मकता आ सकती है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स का मानना है कि नोलन का यह कदम उनकी मानसिक शांति और फोकस के लिए बहुत फायदेमंद है। सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की लत से दूर रहकर वे अपनी क्रिएटिविटी को बरकरार रख पाते हैं। हालांकि, यह हर किसी के लिए संभव नहीं है, लेकिन नोलन की यह जीवनशैली एक उदाहरण है कि कैसे कम तकनीक के साथ भी दुनिया की सबसे बड़ी फिल्में बनाई जा सकती हैं।