मुंबई | आज से करीब 11 साल पहले साल 2015 में अजय देवगन (Ajay Devgn) फिल्म दृश्यम (Drishyam) लेकर आए थे, जिसने लोगों की नींद उड़ा दी थी। उसमें जिस तरह फैमिली इमोशन्स के साथ दिमाग हिलाने वाला ट्विस्ट डाला गया, वह सचमुच हैरान करने वाला था। यह मोहनलाल (Mohanlal) की मलयालम फिल्म दृश्यम का ऑफिशियल रीमेक थी, जिसे जीतू जोसेफ (Jeethu Joseph) ने लिखा था। ‘दृश्यम’ आगे चलकर एक फिल्म फ्रैंचाइजी के रूप में बदली, जिसके अभी तक सभी भाषाओं में तीन पार्ट आए। आज 2 अक्टूबर को अजय की दृश्यम 3 यानी ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ (Drishyam The Conclusion) सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
मोहनलाल से बेहतर अजय की फिल्म?
हिंदी में दृश्यम 3 की कहानी मोहनलाल वाली मलयालम दृश्यम 3 से बिल्कुल अलग है। वैसे तो ‘दृश्यम’ एक रीमेक फ्रैंचाइजी है, मगर इसे हिंदी में बनाने वाले मेकर अभिषेक पाठक (Abhishek Pathak) ने तीसरे पार्ट की कहानी को खुद लिखा है। साथ ही विजय सलगांवकर (Vijay Salgaonkar) की कहानी को फाइनल क्लोजर देकर हिंदी में इस फ्रैंचाइजी का सफर समाप्त किया है। हालांकि मलयालम में दृश्यम 4 भी बनने वाली है, जिसकी घोषणा जीतू जोसेफ पहले ही कर चुके थे।
क्या थी मलयालम दृश्यम 3 की कहानी?
मलयालम वाली दृश्यम 3 की कहानी में जॉर्जकुट्टी (Georgekutty) अपने परिवार के साथ एक नई दुनिया बिताने के ख्वाब देखता है। वह चाहता है कि उसकी बेटी अंजू (Anju) अब शादी करके अपना घर बसाए। मगर शहर में उसकी इमेज विवादित वरुण मर्डर केस के चलते खराब हो चुकी है, जिसके कारण अंजू से कोई शादी नहीं करना चाहता। इस बीच वरुण के पेरेंट्स गीता और प्रभाकर अपने बेटे की मौत का बदला लेने की फिराक में हैं। वे जॉर्जकुट्टी की बेटी के लिए एक पहले से सोची-समझी साजिश रचते हैं, ताकि वह खुद अपने मुंह से वरुण की मौत का सच और अपने पिता का राज खोल सके। गीता और प्रभाकर इस काम में कुछ हद तक सफल होते हैं। लेकिन तभी जॉर्जकुट्टी अपनी बेटी को बचाने के लिए बीच में आ जाता है, और खुद को पुलिस के सामने सरेंडर कर देता है। यही दृश्यम 3 की कहानी का अंत हो जाता है, जो एक सस्पेंस-थ्रिलर कम बल्कि फैमिली-ड्रामा ज्यादा बन जाती है।
क्या है अजय वाली ‘दृश्यम द कंक्लूजन’ की कहानी?
अब अजय देवगन वाली दृश्यम 3 ने इस कहानी का सिर्फ 10 प्रतिशत ही इस्तेमाल किया है। ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ में कहानी सिर्फ विजय सलगांवकर की फैमिली नहीं, बल्कि उसके इर्द-गिर्द हुई पुलिस इनवेस्टिगेशन और इंगेजिंग कोर्ट रूम ड्रामा को भी शामिल करती है। इसमें सैम की डेडबॉडी के आसपास बना सस्पेंस आपकी टेंशन बढ़ाता है। हिंदी वाली दृश्यम 3 में मलयालम जैसे अंजू की मैरिड लाइफ पर फोकस नहीं है। बल्कि इसमें विजय सलगांवकर की समझदारी और अपने दुश्मनों से आगे रहने वाली चालाकी पर ध्यान दिया गया है।
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क्यों बेहतर है हिंदी वाली दृश्यम 3?
हिंदी वाली दृश्यम 3 अपनी फ्रैंचाइजी का जो बेस है, उसको पकड़कर आगे बढ़ती है। जबकि मलयालम वाली दृश्यम 3 फैमिली ड्रामा में ज्यादा घुस जाती है, जो निराश करती है। यानी यह कहना सही होगा कि अजय देवगन ने मोहनलाल वाली पिक्चर का फ्रेम टू फ्रेम रीमेक न बनाकर एक सही फैसला लिया है। इसमें डायरेक्टर-राइटर अभिषेक पाठक की तारीफ बनती है कि उन्होंने फिर वही दमदार फिल्म डिलीवर की, जिसकी लोग उम्मीद लगा रहे थे। क्रिटिक्स और ऑडियंस ने भी यह माना है कि हिंदी वाली दृश्यम 3 मलयालम वाले वर्जन से कई गुना बेहतर है।