नई दिल्ली | त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और इसी बीच सरकार ने चीनी की जमाखोरी (Hoarding) और सप्लाई (Supply) को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब चीनी डीलर एक बार में लंबे समय तक इसका स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे। सरकार ने डीलरों के लिए चीनी रखने की अवधि घटाकर सिर्फ 15 दिन कर दी है। ज्यादातर राज्यों में एक समय पर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी ही रखने की इजाजत होगी। नए नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेंगे।
क्या हैं नए नियम?
- 15 दिन की अवधि: यह अवधि उस दिन से गिनी जाएगी, जिस दिन डीलर को चीनी का स्टॉक मिलेगा। यानी डीलर को तय समय के भीतर अपना स्टॉक आगे बेचना होगा।
- स्टॉक सीमा: ज्यादातर राज्यों में डीलर एक समय पर अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी रख सकेंगे।
- मकसद: सरकार का मकसद सप्लाई चेन में जरूरत से ज्यादा माल जमा होने से रोकना है, ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतों पर अनावश्यक दबाव न बने।
कोलकाता और असम में छूट
इस नियम में कुछ इलाकों को छूट दी गई है। कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र के साथ-साथ असम में डीलर एक समय पर 2,000 क्विंटल तक चीनी का स्टॉक रख सकेंगे। देश के बाकी हिस्सों में 1,000 क्विंटल की सीमा लागू रहेगी।
सरकार ने क्यों बदला नियम?
सरकार ने यह फैसला त्योहारों से पहले लिया है। इस दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि मिलों से निकलने वाली चीनी थोक कारोबारियों और दुकानदारों के जरिए तेजी से बाजार तक पहुंचे। सरकार का कहना है कि स्टॉक रखने की अवधि कम करने से जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही सप्लाई चेन में बेवजह चीनी जमा होने की स्थिति भी कम होगी।
चीनी की कीमतों में गिरावट
सरकार के मुताबिक, चीनी की औसत खुदरा कीमत अगस्त के सबसे ऊंचे स्तर से करीब 15 फीसदी नीचे आ चुकी है। वहीं, मिल से निकलने के समय की कीमत यानी एक्स-मिल कीमतों में करीब 28 फीसदी की गिरावट आई है। सरकार का कहना है कि एक्स-मिल कीमतें पिछले तीन हफ्तों से स्थिर बनी हुई हैं। अब कोशिश यह है कि मिल स्तर पर कीमतों में जो कमी आई है, उसका फायदा आगे चलकर आम उपभोक्ता को भी मिले। इसी वजह से थोक और खुदरा कारोबारियों से कम कीमत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने को कहा गया है।
नए क्रशिंग सीजन पर नजर
गन्ने की पेराई का नया सीजन 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। सरकार ने चीनी मिलों को सलाह दी है कि वे अपने इलाके में गन्ने की उपलब्धता, खेती और मौसम की स्थिति को देखते हुए पेराई शुरू करें। राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वे स्थानीय स्तर पर खेतों की स्थिति को देखते हुए जरूरी कदम उठाएं, ताकि गन्ने की पेराई और चीनी का उत्पादन सुचारु रूप से चलता रहे।
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आम आदमी पर क्या असर?
अगर आप सिर्फ घर के लिए चीनी खरीदते हैं, तो फिलहाल इस फैसले का मतलब यह है कि सरकार त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की सप्लाई और कीमत, दोनों पर नजर रख रही है। स्टॉक की सीमा कम करने का मकसद यह है कि बाजार में जरूरत के मुताबिक चीनी उपलब्ध रहे और जमाखोरी के कारण कीमतें न बढ़ें। वहीं, अगर आप चीनी के थोक या खुदरा कारोबार से जुड़े हैं, तो 15 अक्टूबर से आपको नए स्टॉक नियमों का पालन करना होगा। डीलरों को 15 दिन की अवधि और तय स्टॉक सीमा का ध्यान रखना होगा।