नई दिल्ली | NASA और IBM ने अपने AI मॉडल (Artificial Intelligence Model) की मदद से पूरे मॉनसून एशिया में चावल की खेती का एक बारीक मैप (Detailed Map) तैयार किया है। यह मैप 2018 से 2023 के सैटेलाइट डेटा (Satellite Data) पर आधारित है और 30 मीटर तक की सटीकता से बताता है कि किस जगह धान की खेती हो रही है। इससे पहली बार एशिया में चावल की खेती, उसके पानी के उपयोग और मीथेन उत्सर्जन (Methane Emissions) को लेकर इतनी सटीक जानकारी मिल सकेगी।
क्यों है यह मैप जरूरी?
- एशिया में बड़े पैमाने पर चावल की खेती: एशिया दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक क्षेत्र है, लेकिन छोटे-छोटे और पास-पास स्थित खेतों की सही जानकारी जुटाना पहले मुश्किल था।
- पानी की अधिक खपत: धान की खेती में दुनिया के 24-30% मीठे पानी का इस्तेमाल होता है। इस मैप से यह समझना आसान होगा कि किस इलाके में पानी की जरूरत कितनी है।
- मीथेन गैस का उत्सर्जन: धान के खेतों में पानी भरा रहने से मीथेन गैस बनती है, जो ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) में योगदान देती है। अनुमान है कि दुनिया की कुल मीथेन उत्सर्जन में चावल के खेतों का 32 टेराग्राम योगदान है, जिसका बड़ा हिस्सा एशिया से आता है।
कैसे बना यह मैप?
वैज्ञानिकों ने NASA और IBM के Earth AI मॉडल का उपयोग करते हुए Landsat और Sentinel-2 सैटेलाइट से मिली तस्वीरों के डेटा को प्रोसेस किया। इस AI मॉडल ने अलग-अलग जगहों पर धान के खेतों की पहचान की। इस मैप की सटीकता (Accuracy) 83% से 90% के बीच है, जो औसतन लगभग 84% है।
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मैप का भविष्य में क्या उपयोग होगा?
यह मैप वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि:
- एशिया में धान कहाँ और कितने इलाके में उगाया जा रहा है।
- समय के साथ खेती के पैटर्न (Patterns) में क्या बदलाव हो रहे हैं।
- इस जानकारी का उपयोग पानी की खपत और मीथेन उत्सर्जन का बेहतर अनुमान लगाने में किया जा सकेगा।
- खेती और पर्यावरण से जुड़ी योजनाएं बनाने में सहायता मिलेगी।