पेरिस | फ्रांसीसी नौसेना के पूर्व पायलट पियरे-हेनरी चुएट को फ्रांस में हिरासत में लिया गया है। उन पर चीन को सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। यह वही शख्स है जिसने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे और चीनी विमानों को ‘राफेल किलर’ बताकर विवाद खड़ा कर दिया था।
क्या है पूरा मामला?
फ्रांस की मुख्य घरेलू खुफिया एजेंसी DGSI ने 20 जुलाई 2026 को चुएट के घर की तलाशी ली और उन पर औपचारिक जांच शुरू की। फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, उन पर किसी विदेशी ताकत के साथ खुफिया जानकारी साझा करने, राष्ट्रीय रक्षा से जुड़े राज़ उजागर करने और निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप है। चुएट ने सभी आरोपों से इनकार किया है और उन्हें न्यायिक निगरानी में रखा गया है।
चीन की गुप्त यात्राएं और प्रशिक्षण
आरोप है कि फ्रांसीसी नौसेना में सेवारत रहते हुए, चुएट ने सितंबर 2018 और अगस्त 2019 में चीन की दो गुप्त यात्राएं कीं, जिनकी जानकारी उन्होंने अपने कमांडिंग अधिकारियों को नहीं दी। इन यात्राओं के दौरान, उन्होंने कथित तौर पर चीनी सैन्य पायलटों के लिए प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) संचालन, लैंडिंग तकनीक और E-2C हॉकआई जैसे शुरुआती चेतावनी विमानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की गई। इन यात्राओं का खर्च दक्षिण अफ्रीका की एक फ्लाइंग स्कूल ने उठाया था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और राफेल पर विवादास्पद दावे
पियरे-हेनरी चुएट ने डिफेंस कमेंटेटर के रूप में पहचान बनाई और उनके यूट्यूब चैनल के 5.6 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। 10 मई 2025 को, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तानी वायुसेना के J-10C ने PL-15 मिसाइल से भारतीय राफेल को मार गिराया। बाद के वीडियो में, उन्होंने चीनी J-10C और JF-17 विमानों तथा PL-15 मिसाइल को ‘राफेल किलर’ बताते हुए चीनी तकनीक की प्रशंसा की थी। भारत और फ्रांस दोनों ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
क्यों है यह मामला महत्वपूर्ण?
यह मामला अंतरराष्ट्रीय सैन्य जासूसी और भारत-चीन-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में काफी गंभीर है। एक पूर्व फ्रांसीसी नौसेना पायलट का चीनी पायलटों को प्रशिक्षण देना और फ्रांस के सबसे उन्नत राफेल विमानों के बारे में गलत सूचना फैलाना, राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य गोपनीयता के लिए एक बड़ा खतरा माना गया है। फ्रांसीसी खुफिया एजेंसी पूरे नेटवर्क और इसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।