देश में महंगाई का ‘डबल अटैक’ हुआ है। खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई दर भी उम्मीद से ज्यादा बढ़ी है। मंगलवार को सरकार की ओर से जून का WPI Data जारी किया गया।
आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई जून में बढ़कर 9.87% पर जा पहुंची, जो इससे पहले मई महीने में 9.68% थी। रॉयटर्स के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने इसके 9.15% तक रहने का अनुमान लगाया था।
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें मुख्य वजह
होलसेल महंगाई बढ़ने में सबसे बड़ा रोल खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा और कई प्रमुख औद्योगिक कैटेगरी में प्राइस हाइक का रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य सूचकांक जून में बढ़कर 6.14% हो गया, जो मई में 4.49% था। खाद्य पदार्थों की कीमतों में महीने दर महीने 3.75% की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
22 विनिर्माण समूहों की कीमतें बढ़ीं
मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स के तहत 24 विनिर्माण समूहों में से 22 समूहों की कीमतों में हर महीने बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
सबसे अधिक इजाफा बुनियादी धातुओं, रसायनों और रासायनिक उत्पादों, खाद्य उत्पादों, मशीनरी और उपकरणों में देखने को मिला है।
कुछ चीजें सस्ती भी हुईं
दवाइयों, औषधीय रसायनों और वनस्पति प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट आई। ईंधन और बिजली का सूचकांक भी 113.0 से घटकर 111.1 हो गया।
हालांकि, मिनरल ऑयल की सालाना महंगाई दर 46.48% दर्ज की गई, जो बहुत अधिक है।
खुदरा महंगाई भी RBI के टारगेट से ऊपर
इससे पहले सोमवार को सरकार ने खुदरा महंगाई दर का डेटा जारी किया था। जून में खुदरा महंगाई तेजी से बढ़ते हुए RBI के तय 4% के टारगेट के पार 4.38% हो गई है।
यह लगातार छठा महीने है, जब महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई है। मई महीने में भी इसमें बढ़ोतरी देखने को मिली थी।
अन्य प्रमुख सेक्टरों में महंगाई
बेसिक मेटल्स में महंगाई दर 12.31%, इलेक्ट्रिकल उपकरणों पर 11.03% और टेक्सटाइल्स पर 10.85% रिकॉर्ड की गई।
इन आंकड़ों से साफ है कि महंगाई का दायरा सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्योगों को भी अपनी चपेट में ले रहा है।