स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर बेपटरी हो गई है। डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को वार्ता बीच में छोड़ दी।
तस्नीम न्यूज एजेंसी ने विश्वस्त सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ट्रंप के सख्त बयानों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बाद ईरानी पक्ष ने इसे बातचीत के माहौल के खिलाफ माना और विरोध जताते हुए मीटिंग हॉल से बाहर निकल गया।
ईरान ने लेबनान को बनाया शर्त
ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मेहदी गोरबानजादेह ने सरकारी मीडिया से कहा, ‘जब तक लेबनान की स्थिति का समाधान नहीं हो जाता, तब तक अन्य मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं होगी।’
उन्होंने साफ किया, ‘यदि लेबनान में युद्ध समाप्त नहीं होता, तो दूसरे विषयों पर वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।’ यानी ईरान ने लेबनान के मुद्दे को बातचीत की शर्त बना दिया है।
ट्रंप ने दी थी सैन्य धमकी
इससे पहले स्विट्जरलैंड में जिस वक्त पहले दौर की वार्ता चल रही थी, उसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान को धमकाते हुए एक पोस्ट किया।
उन्होंने कहा, ‘ईरान को तुरंत लेबनान में अपने भारी फंडिंग वाले प्रॉक्सी समूहों को रोकना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम ईरान पर फिर बहुत बड़ा हमला करेंगे, पिछले सप्ताह से भी ज्यादा ताकत के साथ।’
होर्मुज को लेकर भी बयान
फॉक्स न्यूज से फोन पर बातचीत में ट्रंप ने ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कर सकता है।
इन्हीं धमकियों के चलते ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता बीच में छोड़कर हॉल से बाहर निकलने का फैसला किया। उन्हें लगा कि इस माहौल में बातचीत संभव नहीं है।
वार्ता की उम्मीदों पर पानी
इस घटनाक्रम ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। दोनों देशों के बीच हाल ही में एक समझौता हुआ था, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है।
अब सवाल यह है कि क्या यह वार्ता दोबारा शुरू होगी? क्या ट्रंप अपनी धमकियों को वापस लेंगे? या फिर ईरान अपनी शर्तों में नरमी दिखाएगा?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता
इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चिंतित कर दिया है। कई देश चाहते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रहे।
लेकिन इस वॉकआउट ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अभी भी गहरी खाई है। जब तक यह खाई पूरी नहीं होती, तब तक शांति की उम्मीद कम है।
लेबनान का मुद्दा क्यों है अहम?
ईरान का लेबनान से गहरा संबंध है। ईरान हिजबुल्लाह को समर्थन देता है, जो लेबनान की एक प्रमुख राजनीतिक और सैन्य ताकत है।
ट्रंप चाहते हैं कि ईरान लेबनान में हिजबुल्लाह का समर्थन बंद करे। लेकिन ईरान के लिए यह अपनी रणनीति का अहम हिस्सा है, इसलिए वह इस मुद्दे पर समझौता नहीं करना चाहता।
आगे क्या होगा?
अब देखना यह होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरू होती है। अगर ट्रंप अपनी धमकियों को वापस लेते हैं, तो शायद ईरान वापस बातचीत के लिए तैयार हो जाए।
लेकिन अगर दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े रहे, तो संभावना है कि तनाव और बढ़े और युद्ध की स्थिति पैदा हो जाए। फिलहाल हालात बेहद नाजुक हैं।