1 मई से पहले डील नहीं हुई तो बिगड़ सकते हालात, यूरेनियम और होर्मुज पर टकराव चरम पर, ट्रंप की चेतावनियों और ईरान के सख्त रुख के बीच हालात बिगड़ते जा रहे हैं, आने वाले 80 घंटे बेहद अहम
अगले 80 घंटे (80 hours) बेहद अहम हैं। दो जानी दुश्मन आमने-सामने खड़े हैं। दो बड़े मुद्दों – यूरेनियम (uranium) और होर्मुज (Hormuz) पर ऐसी महाभारत छिड़ी है कि दुनिया सांस रोककर देख रही है कि आगे क्या होगा।
1 मई (May 1) से पहले यदि अमेरिका (USA) और ईरान (Iran) के बीच कोई डील (deal) नहीं हुई, तो हालात किस दिशा में जाएंगे, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
क्या है पूरा मामला (What is the full case)?
- डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) तक ईरान की शर्तें (Iran’s conditions) पहुंच चुकी हैं।
- लेकिन यूरेनियम संवर्धन (uranium enrichment) और होर्मुज (Hormuz) को लेकर पेंच (deadlock) अभी भी फंसा हुआ है।
- यदि सहमति (agreement) नहीं बनती है, तो आने वाले दिनों में तबाही की तस्वीरें (destruction) फिर देखने को मिल सकती हैं।
- जैसे-जैसे 1 मई (May 1) की तारीख करीब आ रही है, मिसाइलें (missiles) , धमाके (blasts) और युद्ध की आशंका (war fear) बहुत तेज होती जा रही है।
पिछले 48 घंटे में क्या हुआ (What happened in the last 48 hours)?
पिछले 48 घंटे में मेल-मिलाप (reconciliation) के जरिए समाधान की उम्मीदें कई बार टूटी हैं:
| पक्ष (Party) | कार्रवाई (Action) |
|---|---|
| अमेरिका (USA) | एक ईरानी जहाज (Iranian ship) पर कब्जा (captured) जमा लिया। होर्मुज स्ट्रेट की निगरानी के लिए तीन विनाशकारी वॉरशिप (three destructive warships) ईरानी बंदरगाहों के आसपास तैनात कर रखे हैं। |
| ईरान (Iran) | दो जहाजों (two ships) को रोक लिया और उनके क्रू (crew) को अपने कब्जे में ले लिया। आरोप है कि ये जहाज अमेरिका की मदद कर रहे थे। |
ईरान पर क्या असर पड़ा है (What has been the impact on Iran)?
- अमेरिका हर उस जहाज पर नजर (surveillance) रख रहा है जो ईरान की ओर जा रहा है या वहां से निकल रहा है।
- इसका सीधा असर ईरान के तेल निर्यात (oil export) पर पड़ा है। उसे हर दिन करोड़ों का नुकसान (loss of crores) उठाना पड़ रहा है।
- तेल स्टोरेज (oil storage) की समस्या ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
- लीडरशिप (leadership) से लेकर लड़ाकों (fighters) तक और मिसाइलों (missiles) से लेकर ऑयल डिपो (oil depots) तक, ईरान काफी कुछ गंवा चुका है।
ट्रंप ने क्या कहा (What did Trump say)?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह डील (deal) चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर (on his own terms):
- “मैं सबसे अच्छी डील (best deal) करना चाहता हूं।”
- “होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण (complete control) है। हम इसे तभी खोलेंगे (will open only then) जब वे डील करेंगे।”
- “यदि हम इसे खोल देते हैं, तो वे हर दिन 500 मिलियन डॉलर (500 million dollars) कमाएंगे। मैं नहीं चाहता कि वे ऐसा करें, जब तक मामला सुलझ न जाए।”
ईरान का रुख (Iran’s stance)
ईरान ने भी कह दिया है कि वह अमेरिकी दबाव (American pressure) में झुकने वाला नहीं है।
ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख इब्राहिम अजीजी (Ebrahim Azizi) ने कहा:
- “भले ही हम 400 किलो (400 kg) यूरेनियम दे दें, समस्या हल नहीं होगी। इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिकी अपनी मांगें बढ़ा देंगे।”
आगे क्या (What next)?
हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उससे यही संकेत मिल रहा है कि यदि इस बार युद्ध (war) छिड़ा तो पहले से ज्यादा भयंकर (terrible) होगा।