मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है। शहर के छह निजी अस्पताल (six private hospitals) 1 अप्रैल 2026 से बंद होने की कगार पर हैं। यह कार्रवाई इन अस्पतालों द्वारा अपने जरूरी लाइसेंस का समय पर नवीनीकरण (renewal) न कराने के कारण की जा रही है।
कौन से हैं वो 6 अस्पताल?
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा (Dr. Manish Sharma) ने बुधवार को एक नोटिस जारी कर उन अस्पतालों के नाम बताए हैं, जिन्हें चेतावनी दी गई है:
- जहरा हॉस्पिटल (Zahara Hospital), लालघाटी स्क्वायर
- सरदार पटेल हॉस्पिटल (Sardar Patel Hospital), मोतिया तालाब रोड
- राय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (Rai Hospital), कैपिटल पेट्रोल पंप के पास
- हेल्थ केयर हॉस्पिटल (Health Care Hospital), BDA कॉलोनी
- भगवती गौतम हॉस्पिटल (Bhagwati Gautam Hospital), दानिश कुंज, कोलार रोड
- सचिन ममता हॉस्पिटल (Sachin Mamta Hospital), सोनागिरी पिपलानी पेट्रोल पंप के पास
CMHO ने दी चेतावनी
CMHO डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि इन सभी अस्पतालों को पहले ही नोटिस भेजकर चेतावनी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा, “अगर ये अस्पताल 31 मार्च 2026 के बाद भी बिना वैध लाइसेंस (valid license) के काम करते पाए गए, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (strict legal action) की जाएगी।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन अस्पतालों ने नर्सिंग होम एक्ट (Nursing Home Act) के नियमों के अनुसार रिन्यूअल के लिए आवेदन जमा नहीं किया है। अधिकारियों के अनुसार, इन अस्पतालों को करीब ढाई महीने पहले ही रिन्यूअल के लिए आवेदन करने का समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने नेशनल हेल्थ सर्विसेज़ (NHS) पोर्टल पर आवेदन जमा नहीं किया।
क्यों जरूरी है लाइसेंस रिन्यूअल?
मध्य प्रदेश नर्सिंग होम्स एंड क्लीनिक्स एक्ट, 1973 के तहत बिना वैध रजिस्ट्रेशन के कोई भी प्राइवेट अस्पताल संचालित नहीं किया जा सकता है। लाइसेंस CMHO कार्यालय द्वारा 3 साल की अवधि (3 years validity) के लिए जारी किया जाता है, जिसका हर तीन साल में नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाता है कि अस्पतालों में सही इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर सुविधाएं और मरीजों के इलाज के लिए जरूरी चीजें मौजूद हों।
लोगों में चिंता
इस खबर के बाद भोपाल के लोगों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इन अस्पतालों पर आसपास के कई इलाकों के लोग इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। अगर ये अस्पताल बंद होते हैं, तो स्थानीय मरीजों को इलाज के लिए दूसरी जगहों पर जाना पड़ सकता है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च तक यदि इन अस्पतालों ने लाइसेंस रिन्यूअल नहीं कराया, तो अप्रैल से इन्हें संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी।