देश की सबसे स्वच्छ नदियों में शुमार रही नर्मदा (Narmada) भी अब प्रदूषण की जद में आ रही है। पिछले 17 साल में पहली बार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने मध्य प्रदेश में नर्मदा के एक हिस्से को प्रदूषित बताया है। यह हिस्सा खंडवा (Khandwa) जिले के हनुवंतिया (Hanumantia) के पास है।
हनुवंतिया में बीओडी 7.4 mg/l, यानी सड़ांधयुक्त पानी
सीपीसीबी की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हनुवंतिया के आसपास के हिस्से को प्रायोरिटी श्रेणी-IV (Priority Category-IV) में रखा गया है। यहां बायो-केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर 7.4 मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/l) तक पहुंच गया है, जो प्रदूषित नदी खंड (Polluted River Stretch) की श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि पानी में ऐसे बैक्टीरिया, सीवेज और सड़ांध वाले तत्व मौजूद हैं, जो ठहराव वाले पानी में पैदा होते हैं।
प्रदूषण की दो मुख्य वजहें
विशेषज्ञों के अनुसार, हनुवंतिया में नर्मदा के प्रदूषित होने की दो मुख्य वजहें हैं:
- बाधित बहाव (Obstructed Flow): हनुवंतिया इंदिरा सागर डेम (Indira Sagar Dam) का हिस्सा है, जहां पानी का बहाव बाधित है। यह नदी की सेल्फ प्यूरीफिकेशन (self-purification) प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे प्रदूषक तत्व जमा होने लगते हैं।
- बढ़ता पर्यटन (Increasing Tourism): यहां पर्यटन बढ़ने के कारण मानवीय हस्तक्षेप (human interference) भी बढ़ा है, जो प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन रहा है।
गुजरात में नर्मदा हुई साफ, मप्र में 18 नदियों के हिस्से प्रदूषित
दूसरी ओर, गुजरात की सीमा में नर्मदा का गरुड़ेश्वर से भरूच तक का हिस्सा, जो पहले भारी प्रदूषण का शिकार था, अब प्रदूषण से बाहर आ गया है।
सीपीसीबी ने 2025 की स्थिति में मध्य प्रदेश की 18 नदियों (18 rivers) के कई हिस्सों को प्रदूषित पाया है। इन्हें प्रदूषण स्तर के आधार पर 5 श्रेणियों (पांच श्रेणियों) में बांटा गया है। वहीं, 11 नदी खंडों में सुधार होने पर उन्हें प्रदूषित नदी खंडों की सूची से बाहर कर दिया गया है।
प्रदूषित नदियों के अन्य हिस्से
रिपोर्ट में मप्र की अन्य प्रमुख नदियों के भी कई हिस्से प्रदूषित पाए गए हैं:
- श्रेणी-I (सबसे ज्यादा प्रदूषित): चंबल (नागदा से गांधीसागर तक), खान (इंदौर के पास)
- श्रेणी-II: बेतवा (विदिशा में कंजिया रोड ब्रिज के पास)
- श्रेणी-III: हिरन (जबलपुर), क्षिप्रा (महिदपुर से त्रिवेणी संगम तक)
- श्रेणी-IV: कुंदा (खरगोन), सोन (चितरंगी), नर्मदा (हनुवंतिया)
- श्रेणी-V: बैसली (भिंड), गौर (जबलपुर), सिंध (डबरा), वर्धा (बनगांव), माही (रतलाम), कलियासोत (मंडीदीप), मंदाकिनी (चित्रकूट), पार्वती (राजगढ़), तापी (हतनूर), टोंस (सतना)।
क्या है बीओडी (BOD)?
बीओडी यानी बायो-केमिकल ऑक्सीजन डिमांड पानी में मौजूद ऑर्गेनिक पदार्थों को ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा है। बीओडी का स्तर जितना अधिक होगा, पानी उतना ही अधिक प्रदूषित माना जाता है। 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक बीओडी वाले जल स्रोत प्रदूषित माने जाते हैं।