मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार (26 मई 2026) को एक कॉलेज शिक्षक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। आरोपी खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित सरकारी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर है। लोकायुक्त डीएसपी सुनील टालन के अनुसार, आरोपी को इंदौर के एक ढाबे से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए हिरासत में लिया गया।
कौन है आरोपी और क्या है पूरा मामला?
आरोपी का नाम आत्माराम सोलंकी है। वह खरगोन जिले के मंडलेश्वर स्थित सरकारी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर तैनात है। शिकायतकर्ता मनोज वास्केल इंदौर जिले का निवासी है, जिसने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की थी।
क्या मांगी थी रिश्वत?
आरोपी ने दावा किया था कि उसने ही शिकायतकर्ता की पत्नी की पोस्टिंग धार जिले में करवाई है। इसके बदले में उसने कुल 4 लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी पहले ही 1 लाख रुपये ले चुका था और अब 3 लाख रुपये की और मांग कर रहा था। गिरफ्तारी के समय वह 50 हजार रुपये लेते हुए पकड़ा गया।
महिला प्रोफेसर की पोस्टिंग का सफर
शिकायतकर्ता मनोज वास्केल ने बताया कि उनकी पत्नी उर्मिला वास्केल का चयन मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ था। उनकी पोस्टिंग पहले मंदसौर के दलोदा में हुई थी, बाद में उन्हें धार जिले में तैनाती मिली। आरोपी ने दावा किया कि उसकी वजह से ही उर्मिला की पोस्टिंग धार में हुई और इसके बदले वह पैसे मांग रहा था।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
मनोज वास्केल ने लोकायुक्त पुलिस से शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने रिश्वत लेते पकड़ने की योजना बनाई। आरोपी को इंदौर के एक ढाबे पर 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। फिलहाल आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है।
किन धाराओं में हुआ मामला दर्ज?
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी पर 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगने, पहले 1 लाख रुपये लेने, पोस्टिंग करवाने का झूठा दावा करने और अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे हैं।
अब क्या? आगे की जांच जारी
लोकायुक्त डीएसपी सुनील टालन के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि क्या आरोपी ने पहले भी ऐसा कोई काम किया है, क्या इस मामले में कोई और लोग शामिल हैं, क्या वास्तव में उर्मिला की पोस्टिंग में कोई अनियमितता की गई थी, और आरोपी ने पहले लिए गए 1 लाख रुपये का क्या किया।
ऐसे मामलों में क्या है कानून?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी के मामले में न्यूनतम सजा 3 साल का कारावास है, जबकि अधिकतम सजा 7 साल का कारावास और जुर्माना हो सकती है। ऐसे मामलों में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल होता है।