ग्वालियर | मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक होटल में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अमेरिकी नागरिकों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खातों और निजी जानकारियों को हासिल कर लाखों रुपये की ठगी करते थे। आरोपी खुद को अमेरिका की एक प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था का एजेंट बताकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे।
होटल में चल रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, यह फर्जी कॉल सेंटर पिछले करीब पांच महीने से ग्वालियर जिले के आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित होटल जैनपथ से संचालित किया जा रहा था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर दबिश दी और पूरे रैकेट का खुलासा कर दिया। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों का निजी डेटा हासिल कर उन्हें फोन करते थे और कम ब्याज दरों पर लोन दिलाने का लालच देते थे।
कैसे करते थे ठगी?
आरोपियों की कार्यशैली काफी पेशेवर थी। वे पहले अमेरिकी नागरिकों का डेटा व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए हासिल करते थे। इसके बाद खुद को अमेरिका की “Lending Club” नामक वित्तीय संस्था का प्रतिनिधि बताकर पीड़ितों से संपर्क करते थे। उन्हें कम ब्याज पर लोन दिलाने का भरोसा दिलाया जाता था और फिर लोन प्रोसेसिंग के नाम पर सोशल सिक्योरिटी नंबर, बैंक खाते की जानकारी और अन्य गोपनीय दस्तावेज हासिल कर लिए जाते थे। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उनसे गिफ्ट वाउचर मंगाकर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
आरोपियों को कैसे मिलता था पैसा?
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें हर महीने 15,000 से 20,000 रुपये तक नकद वेतन दिया जाता था। इसके अलावा, वे कथित ठगी की रकम का पांच प्रतिशत कमीशन भी लेते थे। यानी जितनी ज्यादा ठगी, उतना ज्यादा कमीशन। इसी लालच में वे इस गिरोह से जुड़ गए और अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाने लगे।
कौन-कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें शामिल हैं:
- अभिषेक राजपूत (26 वर्ष), निवासी: अहमदाबाद, गुजरात
- शिवेंद्र सिंह परिहार (31 वर्ष), निवासी: अहमदाबाद, गुजरात
- आर्यन राजपूत (20 वर्ष), निवासी: झांसी, उत्तर प्रदेश
- शुभोम घोष (23 वर्ष), निवासी: दीमापुर, नागालैंड
पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल होने वाला सारा सामान बरामद कर लिया है। इसमें शामिल हैं:
- चार लैपटॉप
- सात मोबाइल फोन
- हेडफोन और अन्य डिजिटल उपकरण
- ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाली स्क्रिप्ट
- अमेरिकी ग्राहकों का निजी डेटा
- अन्य डिजिटल साक्ष्य
फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल इस पूरे रैकेट के कथित मास्टरमाइंड प्रवल प्रताप सिंह परिहार की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाया और ठगी की कुल रकम कितनी है।