उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण को समर्पित ‘मिशन शक्ति फेज-6’ के तहत एक बेहद प्रेरणादायक और अनूठी पहल देखने को मिली है। जिले के प्राथमिक विद्यालय अस्ती में छात्राओं के भीतर आत्मविश्वास जगाने और उन्हें भविष्य के नेतृत्व के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान कक्षा चार और पांच की दो मेधावी छात्राओं को प्रतीकात्मक रूप से एक दिन के लिए जिला कलेक्टर (DM) और स्कूल प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी गई। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका आसिया फारुकी की अनूठी पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और महिला सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
एक दिन की प्रिंसिपल बनीं राहेमीन
कक्षा चार की छात्रा राहेमीन को विद्यालय की प्रिंसिपल बनाया गया। उन्होंने प्रधानाध्यापिका की कुर्सी संभालते हुए कक्षाओं में जाकर बच्चों को पढ़ाया और उनकी शैक्षणिक समस्याएं भी सुनीं। इस अनुभव ने उन्हें स्कूल के प्रशासनिक कामकाज को नजदीक से समझने का मौका दिया।
सोनाक्षी संभाली एक दिन की DM की कुर्सी
कक्षा पांच की छात्रा सोनाक्षी को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई। इस तरह दोनों छात्राओं ने नजदीक से समझा कि प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यप्रणाली किस प्रकार संचालित होती है। इन नन्ही बालिकाओं ने अपनी जिम्मेदारियों को जिस बेहतरीन तरीके से निभाया, उसने यह संदेश दिया कि यदि बेटियों को सही अवसर और प्रोत्साहन मिले, तो वे हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका बखूबी निभा सकती हैं।
बाल सुरक्षा और महिला अधिकारों पर जोर
इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान सिर्फ प्रशासनिक कामकाज ही नहीं सिखाया गया, बल्कि बाल सुरक्षा और महिला अधिकारों पर भी खास जोर दिया गया। छात्र-छात्राओं ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी आपस में शेयर की।
इसके जरिए बच्चों को यह समझाया गया कि किसी भी आपात स्थिति या परेशानी में वे कैसे तुरंत मदद मांग सकते हैं और सुरक्षित रह सकते हैं। इस पहल से बच्चों में आत्मरक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संचार हुआ।
डांडिया कार्यक्रम ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के दूसरे चरण में विद्यालय परिसर में एक आकर्षक डांडिया कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। पढ़ाई, सुरक्षा जागरूकता और सांस्कृतिक गतिविधियों के इस खूबसूरत मेल ने बच्चों को सीखने के साथ-साथ अपनी कला और प्रतिभा दिखाने का शानदार अवसर प्रदान किया।
क्यों अहम है यह पहल?
फतेहपुर की यह पहल कई मायनों में खास है—
- नेतृत्व क्षमता का विकास — छात्राओं को प्रशासनिक और शैक्षणिक जिम्मेदारियां देकर उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया गया
- रोल मॉडल का निर्माण — एक दिन के लिए सही, दूसरी बेटियों के लिए प्रेरणा
- सुरक्षा जागरूकता — हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी से बच्चे आपात स्थिति में मदद ले सकेंगे
- मिशन शक्ति का उद्देश्य — महिला सशक्तिकरण और बालिका सुरक्षा का व्यावहारिक उदाहरण
इस तरह फतेहपुर का यह कार्यक्रम साबित करता है कि बेटियों को सही मंच और अवसर मिले तो वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं।