मुंबई | मुंबई पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी, जो झारखंड का रहने वाला 26 वर्षीय छात्र है, महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के नाम पर फर्जी एपीके (APK) फाइलें भेजकर लोगों को ठगता था। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क से अब तक 5,912 लोग ठगी का शिकार हुए हैं और कुल 63.69 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का अनुमान है।
कैसे होती थी ठगी?
आरोपी MGL का नाम इस्तेमाल करके लोगों को फर्जी एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने के लिए भेजता था। एक बार जब पीड़ित इस फर्जी एपीके को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लेता था, तो यह एप्लिकेशन उसके मोबाइल बैंकिंग की गोपनीय जानकारी चुरा लेता था। इसके बाद आरोपी पीड़ितों के बैंक खातों से पैसे निकाल लेता था। मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित ने डीबी मार्ग पुलिस थाने में 70,500 रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई।
कैसे पकड़ा गया आरोपी?
शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपी तक पहुंच बनाई और झारखंड से उसे गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए हैं।
क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने आरोपी से निम्नलिखित सामान बरामद किया:
- 10 मोबाइल फोन
- 1 लैपटॉप
- 7 सिम कार्ड
- 4 क्रेडिट और डेबिट कार्ड
- 967 फर्जी APK फाइलें
- 37,200 लोगों की गोपनीय बैंकिंग जानकारी वाला डेटाबेस
कितनी बड़ी है यह ठगी?
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने 91 फर्जी APK फाइलें अन्य साइबर अपराधियों को बेची थीं। इन फाइलों के जरिए देशभर में 5,912 लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया गया, जिनमें महाराष्ट्र के 512 नागरिक भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क के जरिए अब तक 63,69,68,174 रुपये (करीब 63.69 करोड़) की धोखाधड़ी का अनुमान है।
आगे की जांच
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त मनोज कुमार शर्मा, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बालकवाड़े और पुलिस उपायुक्त रागसुधा आर. के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े का दायरा कितना बड़ा है।