मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और चुनाव आयोग को इन नामों का पूरा विवरण सार्वजनिक करना चाहिए। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर 25 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
कलेक्ट्रेट और CEO कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस 25 सितंबर को मध्य प्रदेश के कलेक्ट्रेट कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करेगी और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय का घेराव करेगी। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की है।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता अधिकारों और चुनावी सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा है। पटवारी ने CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। ये कांग्रेस के आरोप और मांगें हैं; इन पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच या चुनाव आयोग की प्रक्रिया से ही निकलेगा।
पटवारी ने बताए 34 लाख से ज्यादा नाम हटने के आंकड़े
पटवारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया से पहले मध्य प्रदेश में 5,74,06,143 पंजीकृत मतदाता थे। उनके अनुसार, 5,31,31,983 एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त हुए और दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 42,74,160 नाम शामिल नहीं थे।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अंतिम रूप से हटाए गए नामों की संख्या नहीं थी, क्योंकि इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया हुई। पटवारी द्वारा बताए आंकड़ों के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 5,39,81,065 मतदाता थे और अंतिम प्रक्रिया में 34,25,078 नाम हटाए गए।
कांग्रेस ने मांगा 34.25 लाख नामों का पूरा हिसाब
पटवारी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी बताने की मांग की कि दावे-आपत्तियों के दौरान कितने नाम दोबारा जोड़े गए और किन आधारों पर आवेदन स्वीकार या खारिज किए गए।
उन्होंने डिजिटल चुनावी सिस्टम में Electoral Registration Officers (ERO) और Booth Level Officers (BLO) की भूमिका का ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करने की भी मांग की है।
Form-6 को लेकर भी उठा विवाद
SIR के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 को लेकर भी सवाल उठे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इसमें बदलाव किए गए हैं।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर सफाई देते हुए कहा है कि Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR के तहत उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया है। आयोग के अनुसार, यह व्यवस्था उसके पहले के SIR निर्देशों के अनुरूप है।
आयोग ने यह भी कहा है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव का कानूनी अधिकार ERO के पास ही है तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने का माध्यम है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी मुद्दा
SIR को लेकर विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब The Indian Express की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विपक्ष ने दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज कराई।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया और ERO की भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया गया है।
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25 सितंबर को राज्यभर में आंदोलन
कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्यभर में प्रदर्शन की तैयारी की है। पार्टी की मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई, उनके इस्तीफे और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा शामिल है।
मामला अब राजनीतिक विरोध से आगे बढ़कर मतदाता सूची की पारदर्शिता, SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के प्रदर्शन और चुनाव आयोग की ओर से आने वाले जवाबों पर नजर रहेगी।